दृश्य Poetry (page 13)

बे-सर-ओ-सामाँ कुछ अपनी तब्अ से हैं घर में हम

शहाब जाफ़री

तुम्हारी याद तो लिपटी है पूरे घर के मंज़र से

सगुफ़ता यासमीन

दुश्मनी लर्ज़ां है यारो दोस्ती के सामने

शफ़ीउल्लाह राज़

बे-नाम दयारों से हम लोग भी हो आए

शफ़ीक़ सलीमी

अब जा कर एहसास हुआ है प्यार भी करना था

शफ़ीक़ सलीमी

ये सिलसिले भी रिफ़ाक़त के कुछ अजीब से हैं

शबनम शकील

दर आया अंधेरा आँखों में और सब मंज़र धुँदलाए हैं

शबनम शकील

यमन का सितारा

शब्बीर शाहिद

मुसाफ़िर सितारा

शब्बीर शाहिद

सदा रहेगी यही रवानी रवाँ है पानी

शब्बीर शाहिद

मय-ए-फ़राग़त का आख़िरी दौर चल रहा था

शब्बीर शाहिद

नींद से आँख वो मिल कर जागे

शायर लखनवी

ख़्वाब से आँख वो मल कर जागे

शायर लखनवी

निकले तिरी दुनिया के सितम और तरह के

शानुल हक़ हक़्क़ी

औरत

शाद आरफ़ी

मुस्तक़बिल रौशन-तर कहिए

शाद आरफ़ी

मैं अगर फ़िक्र के शह-पर से अलग हो जाऊँ

सीन शीन आलम

एक मंज़र में कई बार उसे देख के देख

सीमा नक़वी

लज़्ज़त-ए-दर्द-ए-अलम ही से सुकूँ आ जाए है

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

हर किसी आँख का बदला हुआ मंज़र होगा

साईल इमरान

ग़ुलाम वहम ओ गुमाँ का नहीं यक़ीं का हूँ

सय्यद नसीर शाह

तो क्या

सय्यद अयाज़ महमूद

कहाँ से ढूँढ के लाऊँ पुराने ख़्वाब आँखों में

सावन शुक्ला

ख़्वाहिश है कि ख़ुद को भी कभी दूर से देखूँ

सऊद उस्मानी

कुछ और अकेले हुए हम घर से निकल कर

सऊद उस्मानी

अपना गिर्या किस के कानों तक जाता है

सऊद उस्मानी

इन्नी-कुंतो-मिनज़्ज़ालेमीन

सत्यपाल आनंद

चमके दूरी में कुछ अक्स निशानों के

सत्तार सय्यद

यहाँ मज़ाफ़ात में

सरवत हुसैन

ये जो फूट बहा है दरिया फिर नहीं होगा

सरवत हुसैन

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