मौसम Poetry (page 11)

जो अपने घर को का'बा मानते हैं

सीमाब ज़फ़र

फ़िराक़-मौसम के आसमाँ में उजाड़ तारे जुड़े हुए हैं

सीमाब ज़फ़र

सुकूँ-पज़ीर जुनून-ए-शबाब हो न सका

सीमाब अकबराबादी

ख़ुद उठ के हाथ मेरे गरेबाँ में आ गए

सीमाब अकबराबादी

सरों पे धूप तो आँखों में ख़्वाब पत्थर के

सय्यद सफ़ी हसन

जो भी तख़्त पे आ कर बैठा उस को यज़्दाँ मान लिया

सय्यद नसीर शाह

मिला न खेत से उस को भी आब-ओ-दाना क्या

सौरभ शेखर

वे सूरतें इलाही किस मुल्क बस्तियाँ हैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मक़्दूर नहीं उस की तजल्ली के बयाँ का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

हिसाब-ए-तर्क-तअल्लुक़ तमाम मैं ने किया

सऊद उस्मानी

साँप को मत जगा

सत्यपाल आनंद

अरीज़े की डाली

सरवत ज़ेहरा

वक़्त भी अब मिरा मरहम नहीं होने पाता

सरवत ज़ेहरा

सवाल-अंदर-सवाल ले कर कहाँ चले हो

सरवत ज़ेहरा

फूल खिले हैं मौसम बदला सहरा के वीरानों का

सरवर नेपाली

बे-कैफ़ जवानी है बे-दर्द ज़माना है

सरवर आलम राज़

यहाँ मज़ाफ़ात में

सरवत हुसैन

एक पुल बनाया जा रहा है

सरवत हुसैन

ये होंट तिरे रेशम ऐसे

सरवत हुसैन

महबूबा के लिए आख़िरी नज़्म

सरमद सहबाई

हमारे लिए सुब्ह के होंट पर बद-दुआ' है

सरमद सहबाई

नज़र भी आया तो ख़ुद से छुपा लिया मैं ने

सरफ़राज़ नवाज़

रौनक़-ए-अहद-ए-जवानी अलविदा'अ

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

लाख समझाया मगर ज़िद पे अड़ी है अब भी

सदार आसिफ़

क़र्ज़

सारा शगुफ़्ता

ऐ मेरे सर-सब्ज़ ख़ुदा

सारा शगुफ़्ता

हज़ार फूल लिए मौसम-ए-बहार आए

साक़िब लखनवी

मैं खिल नहीं सका कि मुझे नम नहीं मिला

साक़ी फ़ारुक़ी

शेर-इमदाद-अली का मेडक

साक़ी फ़ारुक़ी

मौत की ख़ुशबू

साक़ी फ़ारुक़ी

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