मिल Poetry (page 40)

कब तलक यूँ धूप छाँव का तमाशा देखना

अनवर मसूद

कहाँ तक दूर रह पाऊँगा ख़ुद से

अनवर ख़ान

ज़ुल्फ़ को अब्र का टुकड़ा नहीं लिख्खा मैं ने

अनवर जलालपुरी

अन-कहे लफ़्ज़ों में मतलब ढूँढता रहता हूँ मैं

अनवर महमूद खालिद

अन-कहे लफ़्ज़ों का मतलब ढूँढता रहता हूँ मैं

अनवर महमूद खालिद

मिट के आसूदा हो गया हूँ मैं

अंजुम सलीमी

मैं ख़ुद से मिल के कभी साफ़ साफ़ कह दूँगा

अंजुम सलीमी

टूटे हुए प्याले

अंजुम सलीमी

सारा शगुफ़्ता

अंजुम सलीमी

मुझे भी सहनी पड़ेगी मुख़ालिफ़त अपनी

अंजुम सलीमी

हम सा दीवाना कहाँ मिल पाएगा इस दहर में

अंजुम लुधियानवी

यही तुम पर भी खुलना है

अंजुम ख़लीक़

ख़ुश-आमदीद

अंजुम ख़लीक़

सर-ए-राह मिल के बिछड़ गए था बस एक पल का वो हादसा

अंजुम इरफ़ानी

धूप आती नहीं रुख़ अपना बदल कर देखें

अंजुम इरफ़ानी

बड़ी फ़र्ज़-आश्ना है सबा करे ख़ूब काम हिसाब का

अंजुम इरफ़ानी

किस का भेद कहाँ की क़िस्मत पगले किस जंजाल में है

अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी

पथरीली सी शाम में तुम ने ऐसे याद किया जानम

अनीस अंसारी

जहाँ दर था वहाँ दीवार क्यूँ है

अनीस अंसारी

तिरे गेसुओं के साए में जो एक पल रहा हूँ

अनीस अहमद अनीस

वो कौन हैं जिन्हें तौबा की मिल गई फ़ुर्सत

आनंद नारायण मुल्ला

क़हर की क्यूँ निगाह है प्यारे

आनंद नारायण मुल्ला

दुनिया है ये किसी का न इस में क़ुसूर था

आनंद नारायण मुल्ला

बुलबुल-ए-रंगीं-नवा ख़ामोश है

अमजद नजमी

कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा

अमजद इस्लाम अमजद

सेल्फ़ मेड लोगों का अलमिया

अमजद इस्लाम अमजद

एक कमरा-ए-इम्तिहान में

अमजद इस्लाम अमजद

ऐ वक़्त ज़रा थम जा

अमजद इस्लाम अमजद

तुम्हारा हाथ जब मेरे लरज़ते हाथ से छूटा ख़िज़ाँ के आख़िरी दिन थे

अमजद इस्लाम अमजद

निकल के हल्क़ा-ए-शाम-ओ-सहर से जाएँ कहीं

अमजद इस्लाम अमजद

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