नाम Poetry (page 29)

हमारी तबाही में कुछ उस का एहसाँ भी है

साक़ी फ़ारुक़ी

दर्द पुराना आँसू माँगे आँसू कहाँ से लाऊँ

साक़ी फ़ारुक़ी

बाद-ए-निस्याँ है मिरा नाम बता दो कोई

साक़ी फ़ारुक़ी

गई नहीं तिरे ज़ुल्म-ओ-सितम की ख़ू अब तक

संजय मिश्रा शौक़

इक उम्र की देर

समीना राजा

शाएरी झूट सही इश्क़ फ़साना ही सही

समीना राजा

वो आरज़ू कि दिलों को उदास छोड़ गई

समद अंसारी

रौशनी तक रौशनी का रास्ता कह लीजिए

समद अंसारी

वो भी हमारे नाम से बेगाने हो गए

सलमान अख़्तर

वो पास रह के भी मुझ में समा नहीं सकता

सलमान अख़्तर

बे-वज्ह ज़ुल्म सहने की आदत नहीं रही

सलमान अख़्तर

तआ'क़ुब मेरा ख़ुशबू कर रही थी

सलमा शाहीन

आज भी है वही मक़ाम आज भी लब पे उन का नाम

सालिक लखनवी

बढ़ते हैं ख़ुद-ब-ख़ुद क़दम अज़्म-ए-सफ़र को क्या करूँ

सालिक लखनवी

नहीं इक बार भी अब सुनने की ताक़त दिल में

सालिक देहलवी

बाल-ओ-पर हों तो फ़ज़ा काफ़ी है

सलीम शहज़ाद

तू ने ग़म ख़्वाह-मख़ाह उस का उठाया हुआ है

सलीम सरफ़राज़

तू दरिया है और ठहरने वाला मैं

सलीम मुहीउद्दीन

न कोई नाम ओ नसब है न गोश्वारा मिरा

सलीम कौसर

अभी जो गर्दिश-ए-अय्याम से मिला हूँ मैं

सलीम कौसर

मैं रात हव्वा

सलीम फ़िगार

दश्त ओ दर ख़ैर मनाएँ कि अभी वहशत में

सलीम अहमद

लम्हा-ए-रफ़्ता का दिल में ज़ख़्म सा बन जाएगा

सलीम अहमद

इश्क़ में जिस के ये अहवाल बना रक्खा है

सलीम अहमद

इश्क़ और नंग-ए-आरज़ू से आर

सलीम अहमद

बज़्म आख़िर हुई शम्ओं' का धुआँ बाक़ी है

सलीम अहमद

तरब-आफ़रीं है कितना सर-ए-शाम ये नज़ारा

सलाम संदेलवी

ये धरती ख़ूब-सूरत है

सलाम मछली शहरी

धुआँ

सलाम मछली शहरी

बहुत दिनों की बात है....

सलाम मछली शहरी

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