नज़र Poetry (page 104)

आज

असरार-उल-हक़ मजाज़

यूँही बैठे रहो बस दर्द-ए-दिल से बे-ख़बर हो कर

असरार-उल-हक़ मजाज़

ये मेरी दुनिया ये मेरी हस्ती

असरार-उल-हक़ मजाज़

ये जहाँ बारगह-ए-रित्ल-ए-गिराँ है साक़ी

असरार-उल-हक़ मजाज़

वो नक़ाब आप से उठ जाए तो कुछ दूर नहीं

असरार-उल-हक़ मजाज़

कुछ तुझ को ख़बर है हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई

असरार-उल-हक़ मजाज़

करिश्मा-साजी-ए-दिल देखता हूँ

असरार-उल-हक़ मजाज़

हुस्न फिर फ़ित्नागर है क्या कहिए

असरार-उल-हक़ मजाज़

बस इस तक़्सीर पर अपने मुक़द्दर में है मर जाना

असरार-उल-हक़ मजाज़

बर्बाद-ए-तमन्ना पे इताब और ज़ियादा

असरार-उल-हक़ मजाज़

अक़्ल की सतह से कुछ और उभर जाना था

असरार-उल-हक़ मजाज़

वो शख़्स जो नज़र आता था हर किसी की तरह

असरार ज़ैदी

शैतान का फ़रमान

असरार जामई

बिजली हुई फ़ेल

असरार जामई

मैं सच तो कह दूँ पर उस को कहीं बुरा न लगे

असरा रिज़वी

दर्द की जोत मिरे दिल में जगाने वाले

असरा रिज़वी

सूख जाता है हर शजर मुझ में

असलम राशिद

मिरे क़दमों में दुनिया के ख़ज़ाने हैं उठा लूँ क्या

असलम राशिद

पत्थरों पर वादियों में नक़्श-ए-पा मेरा भी है

असलम महमूद

हर रंग-ए-तरब मौसम ओ मंज़र से निकाला

असलम महमूद

बुझ गए मंज़र उफ़ुक़ पर हर निशाँ मद्धम हुआ

असलम महमूद

ज़ीस्त की धूप से यूँ बच के निकलता क्यूँ है

असलम हबीब

कोई गुलाब यहाँ पर खिला के देखते हैं

असलम हबीब

आँख को अश्क बना के देख

असलम हबीब

वो क्या है कौन है ये तो ज़रा बता मुझ को

असलम आज़ाद

किश्त-ए-दिल वीराँ सही तुख़्म-ए-हवस बोया नहीं

असलम आज़ाद

हमारी याद उन्हें आ गई तो क्या होगा

असलम आज़ाद

एक समुंदर एक किनारा एक सितारा काफ़ी है

असलम अंसारी

ख़ुद मैं धूनी रमाए बैठी हूँ

आसिमा ताहिर

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