नज़र Poetry (page 18)

मिरी निगाह किसी ज़ाविए पे ठहरे भी

तारिक़ नईम

मैं आ रहा था सितारों पे पाँव धरते हुए

तारिक़ नईम

हवा का हुक्म भी अब के नज़र में रक्खा जाए

तारिक़ नईम

आज किस ख़्वाब की ताबीर नज़र आई है

तारिक़ नईम

यहाँ के लोग हैं बस अपने ही ख़याल में गुम

तारिक़ मतीन

कुछ दूर तक तो इस की सदा ले गई मुझे

तारिक़ बट

आज इतना जलाओ कि पिघल जाए मिरा जिस्म

तनवीर सिप्रा

सोच का ज़हर न अब शाम-ओ-सहर दे कोई

तनवीर सामानी

रोज़ तब्दील हुआ है मिरे दिल का मौसम

तनवीर सामानी

अहबाब हो गए हैं बहुत मुझ से बद-गुमान

तनवीर सामानी

मैं रख देती हूँ तुम्हारा नाम फ़ोटोग्राफ़र

तनवीर अंजुम

बे-रहम शायरों के जुर्म

तनवीर अंजुम

जचती नहीं कुछ शाही-ओ-इम्लाक नज़र में

तनवीर अंजुम

अजीब शख़्स है पत्थर से पर बनाता है

तनवीर अहमद अल्वी

माल-ओ-ज़र की क़द्र क्या ख़ून-ए-जिगर के सामने

तालिब हुसैन तालिब

ख़्वाब और हक़ीक़त की तस्वीर नज़र आई

तालिब चकवाली

दुनिया से मैं ने भी कोई रग़बत नहीं रखी

तालिब अंसारी

ये कार-ए-बे-समर है अगर कर लिया तो क्या

तालिब अंसारी

फिर क़िस्सा-ए-शब लिख देने के ये दिल हालात बनाए है

तालीफ़ हैदर

नज़ारगी-ए-शौक़ ने दीदार में खींचा

तालीफ़ हैदर

हर रस्म पर नज़र को झुकाते हुए चले

तलअत इशारत

हर अश्क तिरी याद का नक़्श-ए-कफ़-ए-पा है

तख़्त सिंह

उफ़ वो नज़र कि सब के लिए दिल-नवाज़ है

ताजवर नजीबाबादी

नज़र भर के जो देख सकते हैं तुझ को

ताजवर नजीबाबादी

दिल के पर्दों में छुपाया है तिरे इश्क़ का राज़

ताजवर नजीबाबादी

मोहब्बत में ज़ियाँ-कारी मुराद-ए-दिल न बन जाए

ताजवर नजीबाबादी

हुस्न-ए-शोख़-चश्म में नाम को वफ़ा नहीं

ताजवर नजीबाबादी

हश्र में फिर वही नक़्शा नज़र आता है मुझे

ताजवर नजीबाबादी

ऐ आरज़ू-ए-शौक़ तुझे कुछ ख़बर है आज

ताजवर नजीबाबादी

जो मिल गया है यहाँ जल्वा-ए-ख़याली है

ताजदार आदिल

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