नज़र Poetry (page 49)

नौ-ब-नौ एक उमडता हुआ तूफ़ान था मैं

साहिल अहमद

आईना मेरा बदल कर ले गया

साहिल अहमद

मोहलत न दे ज़रा भी मुझे मेरी जान खींच

सहबा वहीद

हम दिल की निगाहों से जहाँ देख रहे हैं

सहर महमूद

देखी है मैं ने ये भी नैरंगी-ए-ज़माना

सहर महमूद

दर्द की सूरत में वो उम्दा सा तोहफ़ा दे गया

सहर महमूद

क़ाबील का साया

सहर अंसारी

हिसाब-ए-शब

सहर अंसारी

तंग आते भी नहीं कशमकश-ए-दहर से लोग

सहर अंसारी

न किसी से करम की उम्मीद रखें न किसी के सितम का ख़याल करें

सहर अंसारी

कहीं वो चेहरा-ए-ज़ेबा नज़र नहीं आया

सहर अंसारी

अब यही रंज-ए-बे-दिली मुझ को मिटाए या बनाए

सहर अंसारी

दे सकेगा न तुम्हें फिर कोई आवाज़ कहीं

सग़ीर अहमद सग़ीर अहसनी

ख़ाक में मिलती हैं कैसे बस्तियाँ मालूम हो

सग़ीर मलाल

कल जिन्हें छू नहीं सकती थी फ़रिश्तों की नज़र

साग़र सिद्दीक़ी

ये जो दीवाने से दो चार नज़र आते हैं

साग़र सिद्दीक़ी

ये जो दीवाने से दो चार नज़र आते हैं

साग़र सिद्दीक़ी

तिरी नज़र के इशारों से खेल सकता हूँ

साग़र सिद्दीक़ी

तेरी नज़र का रंग बहारों ने ले लिया

साग़र सिद्दीक़ी

रूदाद-ए-मोहब्बत क्या कहिए कुछ याद रही कुछ भूल गए

साग़र सिद्दीक़ी

नज़र नज़र बे-क़रार सी है नफ़स नफ़स में शरार सा है

साग़र सिद्दीक़ी

मेरे तसव्वुरात हैं तहरीरें इश्क़ की

साग़र सिद्दीक़ी

एक नग़्मा इक तारा एक ग़ुंचा एक जाम

साग़र सिद्दीक़ी

बरगश्ता-ए-यज़्दान से कुछ भूल हुई है

साग़र सिद्दीक़ी

आहन की सुर्ख़ ताल पे हम रक़्स कर गए

साग़र सिद्दीक़ी

सदियों की शब-ए-ग़म को सहर हम ने बनाया

साग़र निज़ामी

फिर रह-ए-इश्क़ वही ज़ाद-ए-सफ़र माँगे है

साग़र निज़ामी

नदीम-ए-दर्द-ए-मोहब्बत बड़ा सहारा है

साग़र निज़ामी

पस-ए-रौशनी

साग़र ख़य्यामी

नवादिरात की दूकान

साग़र ख़य्यामी

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