नज़र Poetry (page 48)

एक तस्वीर-ए-रंग

साहिर लुधियानवी

एक मुलाक़ात

साहिर लुधियानवी

आना है तो आ राह में कुछ फेर नहीं है

साहिर लुधियानवी

शर्मा के यूँ न देख अदा के मक़ाम से

साहिर लुधियानवी

नफ़स के लोच में रम ही नहीं कुछ और भी है

साहिर लुधियानवी

मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी

साहिर लुधियानवी

इस तरफ़ से गुज़रे थे क़ाफ़िले बहारों के

साहिर लुधियानवी

हवस-नसीब नज़र को कहीं क़रार नहीं

साहिर लुधियानवी

बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बतों के दिए जला के

साहिर लुधियानवी

भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मागर से हम

साहिर लुधियानवी

अब आएँ या न आएँ इधर पूछते चलो

साहिर लुधियानवी

अपनी अपनी ज़ात में गुम हैं अहल-ए-दिल भी अहल-ए-नज़र भी

साहिर होशियारपुरी

तेरे महल में कैसे बसर हो इस की तो गीराई बहुत है

साहिर होशियारपुरी

तैरेगा फ़ज़ा में जो समुंदर न मिलेगा

साहिर होशियारपुरी

मेरे मरने की भी उन को न ख़बर दी जाए

साहिर होशियारपुरी

ख़्वाब देखे थे सुहाने कितने

साहिर होशियारपुरी

हम को मस्ती ओ ख़्वारी आई

साहिर होशियारपुरी

हर एक फूल के दामन में ख़ार कैसा है

साहिर होशियारपुरी

अदू-ए-बद-गुमाँ की दास्ताँ कुछ और कही है

साहिर होशियारपुरी

समद को सरापा सनम देखते हैं

साहिर देहल्वी

निशाँ इल्म-ओ-अदब का अब भी है उजड़े दयारों में

साहिर देहल्वी

मस्त-ए-निगाह-ए-नाज़ का अरमाँ निकालिए

साहिर देहल्वी

हौसला वज्ह-ए-तपिश-हा-ए-दिल-ओ-जाँ न हुआ

साहिर देहल्वी

फ़ज़ा-ए-आलम-ए-क़ुदसी में है नश्व-ओ-नुमा मेरी

साहिर देहल्वी

दिल को यकसूई ने दी तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ की सलाह

साहिर देहल्वी

दरमियान-ए-जिस्म-ओ-जाँ है इक अजब सूरत की आड़

साहिर देहल्वी

दैर-ओ-हरम हैं मंज़र-ए-आईन-ए-इख़तिलाफ़

साहिर देहल्वी

अयाँ हो रंग में और मिस्ल-ए-बू गुल में निहाँ भी हो

साहिर देहल्वी

ख़ुदा के वास्ते अब बे-रुख़ी से काम न ले

साहिर भोपाली

शफ़्फ़ाफ़ रंग

साहिल अहमद

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