नज़र Poetry (page 60)

इस साल शराफ़त का लिबादा नहीं पहना

इक़बाल साजिद

ग़ार से संग हटाया तो वो ख़ाली निकला

इक़बाल साजिद

ग़ार से संग हटाया तो वो ख़ाली निकला

इक़बाल साजिद

वो निगाहों को जब बदलते हैं

इक़बाल सफ़ी पूरी

गुज़र गई जो चमन पर वो कोई क्या जाने

इक़बाल सफ़ी पूरी

गर्दिशों में भी हम रास्ता पा गए

इक़बाल सफ़ी पूरी

दामन-ए-दिल है तार तार अपना

इक़बाल सफ़ी पूरी

नगर में रहते थे लेकिन घरों से दूर रहे

इक़बाल मिनहास

न कोई ग़ैर न अपना दिखाई देता है

इक़बाल मिनहास

कितने ही लोग दिल तलक आ कर गुज़र गए

इक़बाल मतीन

नज़र नज़र में तमन्ना क़दम क़दम पे गुरेज़

इक़बाल माहिर

आँखों के चराग़ वारते हैं

इक़बाल ख़ुसरो क़ादरी

जो ज़ख़्म जम्अ किए आँख-भर सुनाता हूँ

इक़बाल कौसर

देखा है मोहब्बत को इबादत की नज़र से

इक़बाल कैफ़ी

साहिल के तलबगार भी क्या ख़ूब रहे हैं

इक़बाल कैफ़ी

मौज-ए-बला में रोज़ कोई डूबता रहे

इक़बाल कैफ़ी

वो आ रहे हैं वो जा रहे हैं मिरे तसव्वुर पे छा रहे हैं

इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल

मिरी नज़र से जो नज़रें बचाए बैठे हैं

इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल

जो तेरे दर्द हैं वही सब मेरे दर्द हैं

इक़बाल हैदर

ये निगाह-ए-शर्म झुकी झुकी ये जबीन-ए-नाज़ धुआँ धुआँ

इक़बाल अज़ीम

मुझे अपने ज़ब्त पे नाज़ था सर-ए-बज़्म रात ये क्या हुआ

इक़बाल अज़ीम

हर-चंद गाम गाम हवादिस सफ़र में हैं

इक़बाल अज़ीम

बर्ग ठहरे न जब समर ठहरे

इक़बाल अासिफ़

सभी अपने नज़र आते हैं ब-ज़ाहिर लेकिन

इक़बाल अशहर

सिलसिला ख़त्म हुआ जलने जलाने वाला

इक़बाल अशहर

मुझ पर निगाह-ए-गर्दिश-ए-दौराँ नहीं रही

इक़बाल आबिदी

मिले वो दर्स मुझ को ज़िंदगी से

इक़बाल आबिदी

कहीं शबनम कहीं ख़ुशबू कहीं ताज़ा कली रखना

इन्तिज़ार ग़ाज़ीपुरी

चाँद

इंतिख़ाब अालम

रू-ब-रू आईने के मैं हूँ नज़र वो आए

इन्तेसार हुसैन आबिदी शाहिद

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