पानी Poetry (page 6)

गरेबाँ से तिरे किस ने निकाला सुब्ह-ए-ख़ंदाँ को

वहीदुद्दीन सलीम

सहराओं में दरिया भी सफ़र भूल गया है

वहीद अख़्तर

तन्हाई मुझे देखती है

वहीद अहमद

शाफ़्फ़ाफ़ियाँ(2)

वहीद अहमद

शफ़्फ़ाफियाँ

वहीद अहमद

पचासी साल नीचे गिर गए

वहीद अहमद

कोई बस्ती कि मुझ में बस्ती है

वहीद अहमद

ख़ुद-रौ दलीलें

वहीद अहमद

इलाज बिल-मिस्ल

वहीद अहमद

ख़ाक के पुतलों में पत्थर के बदन को वास्ता

वहाब दानिश

अजब सी आज-कल मैं इक परेशानी में हूँ यारो

विनीत आश्ना

अपनी तो गुज़री है अक्सर अपनी ही मन-मानी में

विलास पंडित मुसाफ़िर

ऐसी प्यास और ऐसा सब्र

विकास शर्मा राज़

ज़र्रों की बातों में आने वाला था

विकास शर्मा राज़

दश्त की ख़ाक भी छानी है

विकास शर्मा राज़

बारिश में अक्सर ऐसा हो जाता है

विकास शर्मा राज़

आवाज़

वर्षा गोरछिया

हो के उस कूचे से आई तो सितम ढा गई क्या

उमर अंसारी

मैं ख़ुद अपना लहू पीने लगा हूँ

त्रिपुरारि

ख़ाक होती हुई हस्ती से उठा

तौक़ीर तक़ी

ठहरे पानी पे हाथ मारा था

तौक़ीर अब्बास

एक टहनी से बर्ग टूटा है

तौक़ीर अब्बास

अपने मंज़र से जुदा था इक दिन

तौक़ीर अब्बास

रेशम रेशम तितली देखूँ ख़्वाब-नगर की वादी में

ताैफ़ीक़ साग़र

बाक़ी सब कुछ फ़ानी है

तारिक़ राशीद दरवेश

ये किस की प्यास के छींटे पड़े हैं पानी पर

तारिक़ क़मर

सिसकती मज़लूमियत के नाम

तारिक़ क़मर

जितने अल्फ़ाज़ हैं सब कहे जा चुके

तारिक़ क़मर

जौन-एलिया से आख़री मुलाक़ात

तारिक़ क़मर

ज़ेहन पर बोझ रहा, दिल भी परेशान हुआ

तारिक़ क़मर

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