हत्या Poetry (page 10)

हज़र करो मिरे तन से

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दरीचा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ऐ शाम मेहरबाँ हो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हमीं से अपनी नवा हम-कलाम होती रही

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज यूँ मौज-दर-मौज ग़म थम गया इस तरह ग़म-ज़दों को क़रार आ गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चादर और चार-दीवारी

फ़हमीदा रियाज़

भगत-सिंह के नाम

फ़हीम शनास काज़मी

जब सजीले ख़िराम करते हैं

फ़ाएज़ देहलवी

जब सजीले ख़िराम करते हैं

फ़ाएज़ देहलवी

बे-सबब हम से जुदाई न करो

फ़ाएज़ देहलवी

ऐ सजन वक़्त-ए-जाँ-गुदाज़ी है

फ़ाएज़ देहलवी

उसी जन्नत जहन्नम में मरूँगा

एजाज़ गुल

फैला अजब ग़ुबार है आईना-गाह में

एजाज़ गुल

कुछ आदमी समाज पे बोझल हैं आज भी

दिवाकर राही

फिर मरहला-ए-ख़्वाब-ए-बहाराँ से गुज़र जा

दिल अय्यूबी

मुझ साथ सैर-ए-बाग़ कूँ ऐ नौ-बहार चल

दाऊद औरंगाबादी

दर्पन दिया हूँ दिल का मैं उस दिलरुबा के हाथ

दाऊद औरंगाबादी

ईद है क़त्ल मिरा अहल-ए-तमाशा के लिए

दाग़ देहलवी

बात का ज़ख़्म है तलवार के ज़ख़्मों से सिवा

दाग़ देहलवी

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था

दाग़ देहलवी

सितम ही करना जफ़ा ही करना निगाह-ए-उल्फ़त कभी न करना

दाग़ देहलवी

ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए

दाग़ देहलवी

मिन्नतों से भी न वो हूर-शमाइल आया

दाग़ देहलवी

कौन सा ताइर-ए-गुम-गश्ता उसे याद आया

दाग़ देहलवी

जल्वे मिरी निगाह में कौन-ओ-मकाँ के हैं

दाग़ देहलवी

दिल परेशान हुआ जाता है

दाग़ देहलवी

बाक़ी जहाँ में क़ैस न फ़रहाद रह गया

दाग़ देहलवी

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