रास्ता Poetry (page 21)

किसी बंजर तख़य्युल पर किसी बे-आब रिश्ते में

शहनवाज़ ज़ैदी

संग-ज़नों के वास्ते फिर नए रास्तों में है

शाहिदा तबस्सुम

है शर्त क़ीमत-ए-हुनर भी अब तो रब्त-ए-ख़ास पर

शाहिदा तबस्सुम

है मिरा रंग-ए-सुख़न रंग-ए-बयाँ कुछ मुख़्तलिफ़

शाहिदा लतीफ़

सारे पत्थर और आईने एक से लगते हैं

शाहिदा हसन

सराब-ए-शब भी है ख़्वाब-ए-शिकस्ता-पा भी है

शाहिदा हसन

कोई तारा न दिखा शाम की वीरानी में

शाहिदा हसन

हवा पे चल रहा है चाँद राह-वार की तरह

शाहिदा हसन

यार भी राह की दीवार समझते हैं मुझे

शाहिद ज़की

यार भी राह की दीवार समझते हैं मुझे

शाहिद ज़की

मैं अपने हिस्से की तन्हाई महफ़िल से निकालूँगा

शाहिद ज़की

मीनारों से ऊपर निकला दीवारों से पार हुआ

शाहिद मीर

अजीब लोग

शाहिद माहुली

कुछ दर्द बढ़ा है तो मुदावा भी हुआ है

शाहिद माहुली

भटक रही है अंधेरों में आँख देखे क्या

शाहिद माहुली

सह-पहर ही से कोई शक्ल बनाती है ये शाम

शाहिद लतीफ़

लोग हैरान हैं हम क्यूँ ये किया करते हैं

शाहिद लतीफ़

सोचता है किस लिए तू मेरे यार दे मुझे

शाहिद कमाल

सियाह सफ़्हा-ए-हस्ती पे मैं उभर न सका

शाहिद कलीम

ठुकराओ अब कि प्यार करो मैं नशे में हूँ

शाहिद कबीर

सीने हैं चाक और गरेबाँ सिले हुए

शाहिद इश्क़ी

शहर-ए-निगाराँ में फिरते हैं हम आवारा रात ढले

शाहिद इश्क़ी

रात है शहर-ए-बुताँ है और हम

शाहिद इश्क़ी

महताब है न अक्स-ए-रुख़-ए-यार अब कोई

शाहिद इश्क़ी

सुना है तेरी ज़माने पे हुक्मरानी है

शाहिद ग़ाज़ी

जो तुम से मिला होगा जो तुम ने दिया होगा

शाहिद ग़ाज़ी

इन सभी दरख़्तों को आँधियों ने घेरा है

शाहिद ग़ाज़ी

मुज़्तरिब सा रहता है मुझ से बात करते वक़्त

शाहिद फ़रीद

अपने हमराह मोहब्बत के हवाले रखना

शाहिद फ़रीद

मोहब्बत मुझ से कहती थी ज़रा होश्यार दामन से

शाहिद भोपाली

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