सबसे Poetry (page 42)

मंज़र मिरी आँखों में रहे दश्त-ए-सफ़र के

सलीम शाहिद

हर्फ़-ए-बे-मतलब की मैं ने किस क़दर तफ़्सीर की

सलीम शाहिद

दर्द की ख़ुश्बू से सारा घर मोअ'त्तर हो गया

सलीम शाहिद

अब शहर की और दश्त की है एक कहानी

सलीम शाहिद

सफ़र से आए तो फिर इक सफ़र नसीब हुआ

सलीम सरफ़राज़

रंग-ए-ख़ुलूस गंग-ओ-जमन में नहीं रहा

सलीम सरफ़राज़

यहाँ वहाँ कुछ लफ़्ज़ हैं मेरे नज़्में ग़ज़लें तेरी हैं

सलीम मुहीउद्दीन

तुम तो कहते थे कि सब क़ैदी रिहाई पा गए

सलीम कौसर

वहाँ महफ़िल न सजाई जहाँ ख़ल्वत नहीं की

सलीम कौसर

न कोई नाम ओ नसब है न गोश्वारा मिरा

सलीम कौसर

क्या बताएँ फ़स्ल-ए-बे-ख़्वाबी यहाँ बोता है कौन

सलीम कौसर

इस आलम-ए-हैरत-ओ-इबरत में कुछ भी तो सराब नहीं होता

सलीम कौसर

ग़ुबार होती सदी के सहराओं से उभरते हुए ज़माने

सलीम कौसर

बस इक रस्ता है इक आवाज़ और एक साया है

सलीम कौसर

आब ओ हवा है बरसर-ए-पैकार कौन है

सलीम कौसर

वो चाँद टूट गया जिस से रात रौशन थी

सलीम फ़िगार

बस लौट आना

सलीम फ़िगार

आख़िरी पड़ाव

सलीम फ़िगार

ग़मों की आग पे सब ख़ाल-ओ-ख़द सँवारे गए

सलीम फ़िगार

ग़मों की आग पे सब ख़ाल-ओ-ख़द सँवारे गए

सलीम फ़िगार

फ़स्ल-ए-जुनूँ में दामन-ओ-दिल चाक भी नहीं

सलीम फ़राज़

नाईट-कलब

सलीम बेताब

सफ़र

सलीम अहमद

राख

सलीम अहमद

नींद से पहले

सलीम अहमद

मशरिक़ हार गया

सलीम अहमद

एक दरवाज़े पर

सलीम अहमद

ख़ैर का तुझ को यक़ीं है और उस को शर का है

सलीम अहमद

इश्क़ और नंग-ए-आरज़ू से आर

सलीम अहमद

हर आँख का हासिल दूरी है

सलीम अहमद

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