सबसे Poetry (page 43)

बन के दुनिया का तमाशा मो'तबर हो जाएँगे

सलीम अहमद

मुझे वो नज़्म लिखनी है

सलाम मछली शहरी

मज़दूर लड़की

सलाम मछली शहरी

गुरेज़

सलाम मछली शहरी

धुआँ

सलाम मछली शहरी

आज फिर ये कह रहा हूँ

सलाम मछली शहरी

आग

सलाम मछली शहरी

न मौज-ए-बादा न ज़ुल्फ़ों न इन घटाओं ने

सलाम मछली शहरी

हम ऐसे लोग जल्द असीर-ए-ख़िज़ाँ हुए

सलाम मछली शहरी

मता-ए-होश यहाँ सब ने बेच डाली है

सलाहुद्दीन नय्यर

दर्द को गुर्दा तड़पने को जिगर

सख़ी लख़नवी

मुंकिर-ए-बुत है ये जाहिल तो नहीं

सख़ी लख़नवी

दिल ही मेरा फ़क़त है मतलब का

सख़ी लख़नवी

तस्वीरें

सज्जाद ज़हीर

कभी कभी

सज्जाद ज़हीर

बाढ़

सज्जाद ज़हीर

ज़ुल्फ़ें इधर खुलीं अधर आँसू उमँड पड़े

सज्जाद बाक़र रिज़वी

मन धन सब क़ुर्बान किया अब सर का सौदा बाक़ी है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

ज़हर इन के हैं मिरे देखे हुए भाले हुए

सज्जाद बाक़र रिज़वी

तिरे तग़ाफ़ुल से है शिकायत न अपने मिटने का कोई ग़म है

सज्जाद बाक़र रिज़वी

गलियाँ झाकीं सड़कें छानीं दिल की वहशत कम न हुई

सज्जाद बाक़र रिज़वी

दिल की बिसात पे शाह प्यादे कितनी बार उतारोगे

सज्जाद बाक़र रिज़वी

दिल ख़ूँ हुआ है शोख़ी-ए-रंग-ए-हिना के साथ

सज्जाद बाक़र रिज़वी

दिल है तो मुक़ामात-ए-फुग़ाँ और भी होंगे

सज्जाद बाक़र रिज़वी

अपने जीने को क्या पूछो सुब्ह भी गोया रात रही

सज्जाद बाक़र रिज़वी

अँधेरे दिन की सफ़ारत को आए हैं अब के

सज्जाद बाक़र रिज़वी

ज़मज़मा इज़्तिराब कुछ भी न था

सज्जाद बलूच

तुम ग़लत समझे हमें और परेशानी है

सज्जाद बलूच

तुम ग़लत समझे हमें और परेशानी है

सज्जाद बलूच

दिखाई देंगी सभी मुम्किनात काग़ज़ पर

सज्जाद बलूच

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