रेगिस्तान Poetry (page 41)

मुद्दतों जो रहे बहारों में

अख्तर सईदी

तिरी जबीं पे मिरी सुब्ह का सितारा है

अख़्तर सईद ख़ान

नैरंगी-ए-नशात-ए-तमन्ना अजीब है

अख़्तर सईद ख़ान

कैसे समझाऊँ नसीम-ए-सुब्ह तुझ को क्या हूँ मैं

अख़्तर सईद ख़ान

गुज़रना है जी से गुज़र जाइए

अख़्तर सईद ख़ान

दरिया नज़र न आए न सहरा दिखाई दे

अख़तर मुस्लिमी

जुर्म-ए-हस्ती की सज़ा क्यूँ नहीं देते मुझ को

अख़तर इमाम रिज़वी

दिल वो प्यासा है कि दरिया का तमाशा देखे

अख़तर इमाम रिज़वी

अपना दुख अपना है प्यारे ग़ैर को क्यूँ उलझाओगे

अख़तर इमाम रिज़वी

रेत सहरा नहीं

अख़्तर हुसैन जाफ़री

मैं ग़ैर-महफ़ूज़ रात से डरता हूँ

अख़्तर हुसैन जाफ़री

क़र्या-ए-जाँ से गुज़र कर हम ने ये देखा भी है

अख़्तर होशियारपुरी

मिरी निगाह का पैग़ाम बे-सदा जो हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

मिरी निगाह का पैग़ाम बे-सदा जो हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

मैं ने यूँ देखा उसे जैसे कभी देखा न था

अख़्तर होशियारपुरी

बारहा ठिठका हूँ ख़ुद भी अपना साया देख कर

अख़्तर होशियारपुरी

अपने क़दमों ही की आवाज़ से चौंका होता

अख़्तर होशियारपुरी

रहने दे ये तंज़ के नश्तर अहल-ए-जुनूँ बेबाक नहीं

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

ये ग़ाज़ा है काजल है उबटन है क्या है

अख़लाक़ अहमद आहन

किसे जाना कहाँ है मुनहसिर होता है इस पर भी

अखिलेश तिवारी

काग़ज़ प हर्फ़ हर्फ़ निखर जाना चाहिए

अखिलेश तिवारी

अभी ज़मीन को हफ़्त आसमाँ बनाना है

अकबर हमीदी

बे-तकल्लुफ़ बोसा-ए-ज़ुल्फ़-ए-चलीपा लीजिए

अकबर इलाहाबादी

दुश्वार है इस अंजुमन-आरा को समझना

अजमल सिराज

हर उजाला नई सहर तो नहीं

अजमल अजमली

जहाँ न दिल को सुकून है न है क़रार मुझे

आजिज़ मातवी

ज़माने हो गए तेरे करम की आस लगी

अजीत सिंह हसरत

धुआँ सिफ़त हूँ ख़लाओं का है सफ़र मुझ को

अजीत सिंह हसरत

लगा के धड़कन में आग मेरी ब-रंग-ए-रक़्स-ए-शरर गया वो

अजय सहाब

कहा दिन को भी ये घर किस लिए वीरान रहता है

ऐतबार साजिद

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