रात Poetry (page 82)

वस्ल की शब भी ख़फ़ा वो बुत-ए-मग़रूर रहा

अमीर मीनाई

तीर पर तीर लगाओ तुम्हें डर किस का है

अमीर मीनाई

साफ़ कहते हो मगर कुछ नहीं खुलता कहना

अमीर मीनाई

क़िबला-ए-दिल काबा-ए-जाँ और है

अमीर मीनाई

फूलों में अगर है बू तुम्हारी

अमीर मीनाई

न बेवफ़ाई का डर था न ग़म जुदाई का

अमीर मीनाई

मुझ मस्त को मय की बू बहुत है

अमीर मीनाई

क्या रोके क़ज़ा के वार तावीज़

अमीर मीनाई

कहा जो मैं ने कि यूसुफ़ को ये हिजाब न था

अमीर मीनाई

जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का

अमीर मीनाई

हम जो मस्त-ए-शराब होते हैं

अमीर मीनाई

हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी

अमीर मीनाई

हैं न ज़िंदों में न मुर्दों में कमर के आशिक़

अमीर मीनाई

गले में हाथ थे शब उस परी से राहें थीं

अमीर मीनाई

बात करने में तो जाती है मुलाक़ात की रात

अमीर मीनाई

अमीर लाख इधर से उधर ज़माना हुआ

अमीर मीनाई

ऐ ज़ब्त देख इश्क़ की उन को ख़बर न हो

अमीर मीनाई

अब इस जहान-ए-बरहना का इस्तिआरा हुआ

अमीर इमाम

ख़त का इंतिज़ार

अमीर औरंगाबादी

पस-ए-दीवार-ए-शब

अमीक़ हनफ़ी

दुआ की शाख़ पर

अमीक़ हनफ़ी

बम्बई रात समुंदर

अमीक़ हनफ़ी

है नूर-ए-ख़ुदा भी यहाँ इरफ़ान-ए-ख़ुदा भी

अमीक़ हनफ़ी

'अमीक़' छेड़ ग़ज़ल ग़म की इंतिहा कब है

अमीक़ हनफ़ी

हमीं थे जान-ए-बहाराँ हमीं थे रंग-ए-तरब

अमीन राहत चुग़ताई

रख दिया मैं ने दर-ए-हुस्न पे हारा हुआ इश्क़

अमीन अडीराई

रस्ता रोकती ख़ामोशी ने कौन सी बात सुनानी है

अम्बरीन सलाहुद्दीन

मिरी आँखों में मंज़र धुल रहा था

अम्बरीन सलाहुद्दीन

वो मसीहा न बना हम ने भी ख़्वाहिश नहीं की

अंबरीन हसीब अंबर

ख़ुशी का लम्हा रेत था सो हाथ से निकल गया

अंबरीन हसीब अंबर

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