रात Poetry (page 80)

अनजाने ख़्वाब की ख़ातिर क्यूँ चैन गँवाया

अंजुम अंसारी

ऐ दो-जहाँ के मालिक आ'ला है नाम तेरा

अनीसा बेगम

मुझे इल्ज़ाम न दे तर्क-ए-शकेबाई का

अंदलीब शादानी

इल्म-ओ-जाह-ओ-ज़ोर-ओ-ज़र कुछ भी न देखा जाए है

आनंद नारायण मुल्ला

बशर को मशअ'ल-ए-ईमाँ से आगही न मिली

आनंद नारायण मुल्ला

कहा झुँझला के अहल-ए-क़ाफ़िला से एक रहबर ने

अम्न लख़नवी

तुम अगर चाहो तो

अमजद नजमी

उन के वा'दों का हाल क्या कहिए

अमजद नजमी

तुम जल्वा दिखाओ तो ज़रा पर्दा-ए-दर से

अमजद नजमी

सोज़ है दिल के दाग़ में अब तक

अमजद नजमी

नहीं कुछ इंतिहा अफ़्सुर्दगी की

अमजद नजमी

सेल्फ़ मेड लोगों का अलमिया

अमजद इस्लाम अमजद

बुज़दिल

अमजद इस्लाम अमजद

ऐ हिज्र-ज़दा शब

अमजद इस्लाम अमजद

आबला

अमजद इस्लाम अमजद

उस ने आहिस्ता से जब पुकारा मुझे

अमजद इस्लाम अमजद

शाम ढले जब बस्ती वाले लौट के घर को आते हैं

अमजद इस्लाम अमजद

पलकों की दहलीज़ पे चमका एक सितारा था

अमजद इस्लाम अमजद

न आसमाँ से न दुश्मन के ज़ोर ओ ज़र से हुआ

अमजद इस्लाम अमजद

कितनी सरकश भी हो सर-फिरी ये हवा रखना रौशन दिया

अमजद इस्लाम अमजद

किसी की आँख में ख़ुद को तलाश करना है

अमजद इस्लाम अमजद

कभी रक़्स-ए-शाम-ए-बहार में उसे देखते

अमजद इस्लाम अमजद

हुज़ूर-ए-यार में हर्फ़ इल्तिजा के रक्खे थे

अमजद इस्लाम अमजद

दश्त-ए-बे-आब की तरह गुज़री

अमजद इस्लाम अमजद

चेहरे पे मिरे ज़ुल्फ़ को फैलाओ किसी दिन

अमजद इस्लाम अमजद

भीड़ में इक अजनबी का सामना अच्छा लगा

अमजद इस्लाम अमजद

अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा

अमजद इस्लाम अमजद

दिल धड़कता है शब-ए-ग़म में कहीं ऐसा न हो

अमीरुल्लाह तस्लीम

वस्ल में बिगड़े बने यार के अक्सर गेसू

अमीरुल्लाह तस्लीम

वस्ल की शब भी अदा-ए-रस्म-ए-हिरमाँ में रहा

अमीरुल्लाह तस्लीम

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