वृक्षारोपण Poetry (page 7)
है कोई दर्द मुसलसल रवाँ-दवाँ मुझ में
शबाना यूसुफ़
असर न हो तो उसी नुत्क़-ए-बे-असर से कह
शानुल हक़ हक़्क़ी
यही ठहरा कि अब उस ओर जाना भी नहीं है
सीमाब ज़फ़र
फ़िराक़-मौसम के आसमाँ में उजाड़ तारे जुड़े हुए हैं
सीमाब ज़फ़र
लैला का अगर मुझ को किरदार मिला होता
सीमा शर्मा मेरठी
तमाम उम्र जिसे आब-ए-तल्ख़ से सींचा
सय्यद सफ़ी हसन
है इश्क़ तो फिर असर भी होगा
सययद मोहम्म्द अब्दुल ग़फ़ूर शहबाज़
आसाँ तो न था धूप में सहरा का सफ़र कुछ
सौरभ शेखर
नज़र के भेद सब अहल-ए-नज़र समझते हैं
सऊद उस्मानी
सब घरों में तो चराग़ों का उजाला होगा
सत्य नन्द जावा
यूँ एहतिमाम-ए-रद्द-ए-सहर कर दिया गया
सत्तार सय्यद
वही है दश्त-ए-सफ़र रहगुज़र से आगे भी
सत्तार सय्यद
मोहब्बत में कोई तन्हा सफ़र अच्छा नहीं लगता
सरवर नेपाली
थामी हुई है काहकशाँ अपने हाथ से
सरवत हुसैन
जंगल में कभी जो घर बनाऊँ
सरवत हुसैन
घर से निकला तो मुलाक़ात हुई पानी से
सरवत हुसैन
ख़ुशबुओं का शजर नहीं देखा
संजीव आर्या
राह मिलती है घर नहीं मिलता
सलमान सईद
यूँ तिरी चाप से तहरीक-ए-सफ़र टूटती है
सलीम सिद्दीक़ी
तुझ को पाने के लिए ख़ुद से गुज़र तक जाऊँ
सलीम सिद्दीक़ी
बदन क़ुबूल है उर्यानियत का मारा हुआ
सलीम सिद्दीक़ी
वो ख़ूँ बहा कि शहर का सदक़ा उतर गया
सलीम शाहिद
सुब्ह-ए-सफ़र का राज़ किसी पर यहाँ न खोल
सलीम शाहिद
रौशन सुकूत सब उसी शो'ला-बयाँ से है
सलीम शाहिद
रास्ता चाहिए दरिया की फ़रावानी को
सलीम शाहिद
फिर कोई महशर उठाने मेरी तन्हाई में आ
सलीम शाहिद
मिरी थकन मिरे क़स्द-ए-सफ़र से ज़ाहिर है
सलीम शाहिद
मौसम का ज़हर दाग़ बने क्यूँ लिबास पर
सलीम शाहिद
खुलती है गुफ़्तुगू से गिरह पेच-ओ-ताब की
सलीम शाहिद
अब्र सरका चाँद की चेहरा-नुमाई हो गई
सलीम शाहिद
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