व्यक्ति Poetry (page 12)

ढूँडते ढूँडते ख़ुद को मैं कहाँ जा निकला

सरवर आलम राज़

मैं तुम्हें याद कर रहा था

सरवत हुसैन

किस शख़्स की तलाश में सर फोड़ती रही

सरमद सहबाई

किसे ख़बर थी कि इस को भी टूट जाना था

सरफ़राज़ नवाज़

आज दीवाने का ज़ौक़-ए-दीद पूरा हो गया

सरदार सलीम

आधा कमरा

सारा शगुफ़्ता

जिस शख़्स के जीते जी पूछा न गया 'साक़िब'

साक़िब लखनवी

मुद्दत हुई इक शख़्स ने दिल तोड़ दिया था

साक़ी फ़ारुक़ी

यूँ मिरे पास से हो कर न गुज़र जाना था

साक़ी फ़ारुक़ी

ये किस ने भरम अपनी ज़मीं का नहीं रक्खा

साक़ी फ़ारुक़ी

हैं सेहर-ए-मुसव्विर में क़यामत नहीं करते

साक़ी फ़ारुक़ी

मज़हब की किताबों में भी इरशाद हुआ मैं

संजय मिश्रा शौक़

इक वही शख़्स मुझ को याद रहा

सलमान अख़्तर

जीना अज़ाब क्यूँ है ये क्या हो गया मुझे

सलमान अख़्तर

धूप पीछा नहीं छोड़ेगी ये सोचा भी नहीं

सलमा शाहीन

तमाम उम्र की तन्हाइयों पे भारी थी

सलीम शुजाअ अंसारी

जब आसमान ज़मीं पर उतरने लगता है

सलीम शुजाअ अंसारी

हज़ारों रंज मिले सैंकड़ों मलाल मिले

सलीम शुजाअ अंसारी

धड़कनें बन के जो सीने में रहा करता था

सलीम शुजाअ अंसारी

दालान में कभी कभी छत पर खड़ा हूँ मैं

सालिम सलीम

तुझ को पाने के लिए ख़ुद से गुज़र तक जाऊँ

सलीम सिद्दीक़ी

नहीं है कोई दूसरा मंज़र चारों ओर

सलीम शहज़ाद

लगता है वो आज ख़्वाब जैसा

सलीम शहज़ाद

अब शहर की और दश्त की है एक कहानी

सलीम शाहिद

तू ने देखा नहीं इक शख़्स के जाने से 'सलीम'

सलीम कौसर

तुझ से बढ़ कर कोई प्यारा भी नहीं हो सकता

सलीम कौसर

न कोई नाम ओ नसब है न गोश्वारा मिरा

सलीम कौसर

इक घड़ी वस्ल की बे-वस्ल हुई है मुझ में

सलीम कौसर

दिल-ए-सीमाब-सिफ़त फिर तुझे ज़हमत दूँगा

सलीम कौसर

दिल तुझे नाज़ है जिस शख़्स की दिलदारी पर

सलीम कौसर

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