व्यक्ति Poetry (page 9)

किताब पढ़ते रहे और उदास होते रहे

शमीम हनफ़ी

अब क़ैस है कोई न कोई आबला-पा है

शमीम हनफ़ी

शर्मीली छूई-मूई अजब मोहनी सी थी

शमीम फ़ारूक़ी

जो भी कहना हो वहाँ मेरी ज़बानी कहना

शमीम फ़ारूक़ी

वो एक शख़्स मिरे पास जो रहा भी नहीं

शमीम अब्बास

जो शख़्स मुद्दतों मिरे शैदाइयों में था

शकीला बानो

याद तुम आए तो फिर बन गईं बादल आँखें

शकील शम्सी

जाँ के ज़ियाँ को ग़म की तलाफ़ी समझ लिया

शकील जाज़िब

जो दिल पे गुज़रती है वो समझा नहीं सकते

शकील बदायुनी

साहिल तमाम अश्क-ए-नदामत से अट गया

शकेब जलाली

कनार-ए-आब खड़ा ख़ुद से कह रहा है कोई

शकेब जलाली

हवस-ए-वक़्त का अंदाज़ा लगाया जाए

शकेब अयाज़

बाग़ में कलियों का मुस्काना गया

शाइस्ता सहर

कोेसा दूध

शहज़ाद हसन

शहर का शहर अगर आए भी समझाने को

शहज़ाद अहमद

सब्त है चेहरों पे चुप बन में अंधेरा हो चुका

शहज़ाद अहमद

दिल का बुरा नहीं मगर शख़्स अजीब ढब का है

शहज़ाद अहमद

वो कौन था वो कहाँ का था क्या हुआ था उसे

शहरयार

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है

शहरयार

न ख़ुश-गुमान हो इस पर तू ऐ दिल-ए-सादा

शहरयार

वो बेवफ़ा है हमेशा ही दिल दुखाता है

शहरयार

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है

शहरयार

शहर-ए-जुनूँ में कल तलक जो भी था सब बदल गया

शहरयार

किस फ़िक्र किस ख़याल में खोया हुआ सा है

शहरयार

हवा का ज़ोर ही काफ़ी बहाना होता है

शहरयार

दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता है मुझे

शहरयार

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो

शहरयार

जो इस बरस नहीं अगले बरस में दे दे तू

शहराम सर्मदी

फ़ज़ा होती ग़ुबार-आलूदा सूरज डूबता होता

शहराम सर्मदी

मिरी तरह से कहीं ख़ाक छानता होगा

शहनाज़ मुज़म्मिल

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