तस्वीर Poetry (page 9)

आँखों से मअ'नी-ए-सुख़न-ए-मीर देखते

शफ़क़ सुपुरी

सर-ए-तस्लीम ख़म करना पड़ा तक़्सीर से पहले

शायर फतहपुरी

शक्ल-ए-मिज़्गाँ न ख़ार की सी है

शाद लखनवी

फ़क़त शोर-ए-दिल-ए-पुर-आरज़ू था

शाद अज़ीमाबादी

तमाम उम्र की आवारगी पे भारी है

शबनम रूमानी

तब्सिरा यूँ न मिरे हाल पे इतना होता

शबनम नक़वी

ये अपने आप पे ताज़ीर कर रही हूँ मैं

शबाना यूसुफ़

पाई न कोई मंज़िल पहुँचीं न कहीं राहें

शानुल हक़ हक़्क़ी

मोहब्बत ख़ार-ए-दामन बन के रुस्वा हो गई आख़िर

शानुल हक़ हक़्क़ी

इक महक सी दम-ए-तहरीर कहाँ से आई

शानुल हक़ हक़्क़ी

रंग उड़ कर रौनक़-ए-तस्वीर आधी रह गई

सेहर इश्क़ाबादी

वक़्त ने इक नज़र जो डाली है

सीमान नवेद

मिरे हक़ में कोई ऐसी दुआ कर

सीमान नवेद

जब भी भूले से कभी लब पे हँसी आई है

सीमाब सुल्तानपुरी

रंग भरते हैं वफ़ा का जो तसव्वुर में तिरे

सीमाब अकबराबादी

ये किस ने शाख़-ए-गुल ला कर क़रीब-ए-आशियाँ रख दी

सीमाब अकबराबादी

वुसअतें महदूद हैं इदराक-ए-इंसाँ के लिए

सीमाब अकबराबादी

वो जब रंग-ए-परेशानी को ख़ल्वत-गीर देखेंगे

सीमाब अकबराबादी

शायद जगह नसीब हो उस गुल के हार में

सीमाब अकबराबादी

महफ़िल-ए-इश्क़ में जब नाम तिरा लेते हैं

सीमाब अकबराबादी

जल्वा-गाह-ए-दिल में मरते ही अँधेरा हो गया

सीमाब अकबराबादी

जब तक ग़म-ए-उल्फ़त का उंसुर न मिला होगा

सीमाब अकबराबादी

ब-क़ैद-ए-वक़्त ये मुज़्दा सुना रहा है कोई

सीमाब अकबराबादी

अब ऐ बे-दर्द क्या इस के लिए इरशाद होता है

सीमाब अकबराबादी

अजब ही हाल था आवाज़ का तो

सावन शुक्ला

सदमा हर-चंद तिरे जौर से जाँ पर आया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ज़िंदगी के कटहरे में इक बे-ख़ता आदमी की तरह

सत्तार सय्यद

तलख़ीस के बदन में तफ़्सीर बोलती है

सरवर अरमान

रौशनी से तीरगी ताबीर कर दी जाएगी

सरवर अरमान

आँखों में दमक उट्ठी है तस्वीर-ए-दर-ओ-बाम

सरवत हुसैन

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