तस्वीर Poetry (page 10)

क़िन्दील-ए-मह-ओ-मेहर का अफ़्लाक पे होना

सरवत हुसैन

पहनाए-बर-ओ-बहर के महशर से निकल कर

सरवत हुसैन

आँखों में सौग़ात समेटे अपने घर आते हैं

सरवत हुसैन

मिल-जुल कर ईमान ख़ुदा पर ला सकते हैं

सरफ़राज़ ज़ाहिद

ख़ुद से अपना आप मिलाया जा सकता है

सरफ़राज़ ज़ाहिद

कभी होंटों पे ऐसा लम्स अपनी आँख खोले

सरफ़राज़ ज़ाहिद

आँखों ने बनाई थी कोई ख़्वाब की तस्वीर

सरफ़राज़ ख़ालिद

ख़बर है मेरी रुस्वाई की

सरफ़राज़ शाहिद

रह कर मकान में मिरे मेहमान जाइए

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

ख़ता उस की मुआफ़ी से बड़ी है

सदार आसिफ़

बदन से पूरी आँख है मेरी

सारा शगुफ़्ता

मंज़िलें लाख कठिन आएँ गुज़र जाऊँगा

साक़ी अमरोहवी

अपनी लौ में कोई डूबा ही नहीं

समद अंसारी

कैसे कैसे रंग हैं तन्हाई की तस्वीर में

सलमान सिद्दीक़ी

यूँ भला तुम पर सजा कब आइने में देखना

सलमान सिद्दीक़ी

चश्म-ए-नम पहले शफ़क़ बन के सँवरना चाहे

सलमा शाहीन

ग़ुबार-ए-फ़िक्र को तहरीर करता रहता हूँ

सलीम शुजाअ अंसारी

अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे

सालिम सलीम

खींच भी लीजिए अच्छा तो है तस्वीर-ए-जुनूँ

सालिक लखनवी

ज़ुल्मत है तो फिर शो'ला-ए-शब-गीर निकालो

सलीम शाहिद

मत पूछ हर्फ़-ए-दर्द की तफ़्सीर कुछ भी हो

सलीम शाहिद

हर्फ़-ए-बे-मतलब की मैं ने किस क़दर तफ़्सीर की

सलीम शाहिद

है आरज़ू कि अपना सरापा दिखाई दे

सलीम शाहिद

बे-वज़्अ शब-ओ-रोज़ की तस्वीर दिखा कर

सलीम शाहिद

अब्र सरका चाँद की चेहरा-नुमाई हो गई

सलीम शाहिद

अब शहर की और दश्त की है एक कहानी

सलीम शाहिद

इधर उधर से किताब देखूँ

सलीम मुहीउद्दीन

साल की आख़िरी शब

सलीम कौसर

वो जो आए थे बहुत मंसब-ओ-जागीर के साथ

सलीम कौसर

मोहलत न मिली ख़्वाब की ताबीर उठाते

सलीम कौसर

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