जीवन Poetry (page 64)

हिकायत-ए-हुस्न-ए-यार लिखना हदीस-ए-मीना-ओ-जाम कहना

अज़ीज़ हामिद मदनी

हवा आशुफ़्ता-तर रखती है हम आशुफ़्ता-हालों को

अज़ीज़ हामिद मदनी

इक ख़्वाब-ए-आतिशीं का वो महरम सा रह गया

अज़ीज़ हामिद मदनी

आज मुक़ाबला है सख़्त मीर-ए-सिपाह के लिए

अज़ीज़ हामिद मदनी

वफ़ा के नाम पर पैरा किए कच्चे घड़े ले कर

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

मुझे चखते ही खो बैठा वो जन्नत अपने ख़्वाबों की

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

हम ऐसे सूरमा हैं लड़ के जब हालात से पलटे

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

फ़साना-दर-फ़साना फिर रही है ज़िंदगी जब से

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

ज़िंदगी के सारे मौसम आ के रुख़्सत हो गए

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

ज़रा मुश्किल से समझेंगे हमारे तर्जुमाँ हम को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

पड़ा है ज़िंदगी के इस सफ़र से साबिक़ा अपना

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

निकलना ख़ुद से मुमकिन है न मुमकिन वापसी मेरी

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

लिया है किस क़दर सख़्ती से अपना इम्तिहाँ हम ने

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

ख़ुद में उतरूँगी तो मैं भी लापता हो जाऊँगी

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

अलावा इक चुभन के क्या है ख़ुद से राब्ता मेरा

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

कुछ ज़िंदगी में इश्क़-ओ-वफ़ा का हुनर भी रख

अज़ीज़ अन्सारी

एक इक साँस में सदियों का सफ़र काटते हैं

अज़हर नक़वी

दरीचे सो गए शब जागती है

अज़हर नैयर

जल्वे हवा के दोश ये कोई घटा के देख

अज़हर लखनवी

तू भी वफ़ा के रूप में अब ढल के देख ले

अज़हर जावेद

बनाए ज़ेहन परिंदों की ये क़तार मिरा

अज़हर इनायती

वफ़ा ख़ुलूस का सिंगार रोज़ करती है

अज़हर हाश्मी

गुज़रे हुए लम्हात को अब ढूँड रहा हूँ

अज़हर हाश्मी

जो ज़िंदगी की माँग सजाते रहे सदा

अज़हर अदीब

मिरी कहानी तिरी कहानी से मुख़्तलिफ़ है

अज़हर अब्बास

कुछ ऐसे फूल भी गुज़रे हैं मेरी नज़रों से

आज़ाद गुलाटी

तुम्हारे पास रहें हम तो मौत भी क्या है

आज़ाद गुलाटी

मैं अपने आप से इक खेल करने वाला हूँ

आज़ाद गुलाटी

लम्हा लम्हा इक नई सई-ए-बक़ा करती हुई

आज़ाद गुलाटी

जो ग़म में जलते रहे उम्र-भर दिया बन कर

आज़ाद गुलाटी

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