विद्वान Poetry (page 12)

रोज़ शाम होती है रोज़ हम सँवरते हैं

शकीला बानो

निगाह ओ दिल के तमाम रिश्ते फ़ज़ा-ए-आलम से कट गए हैं

शकील जाज़िब

लम्हात-ए-याद-ए-यार को सर्फ़-ए-दुआ न कर

शकील बदायुनी

ज़लज़ला

शकील बदायुनी

नुमाइश-ए-अलीगढ़

शकील बदायुनी

वो यूँ खो के मुझे पाया करेंगे

शकील बदायुनी

वज्ह-ए-क़द्र-ओ-क़ीमत-ए-दिल हुस्न की तनवीर है

शकील बदायुनी

उन के बग़ैर हम जो गुलिस्ताँ में आ गए

शकील बदायुनी

तिरे बग़ैर अजब बज़्म-ए-दिल का आलम है

शकील बदायुनी

शिकवे तिरे हुज़ूर किए जा रहा हूँ मैं

शकील बदायुनी

राह-ए-ख़ुदा में आलम-ए-रिन्दाना मिल गया

शकील बदायुनी

रह वफ़ा में कोई साहिब-ए-जुनूँ न मिला

शकील बदायुनी

मौसम-ए-गुल साथ ले कर बर्क़ ओ दाम आ ही गया

शकील बदायुनी

लम्हा लम्हा बार है तेरे बग़ैर

शकील बदायुनी

ला रहा है मय कोई शीशे में भर के सामने

शकील बदायुनी

जुनूँ से गुज़रने को जी चाहता है

शकील बदायुनी

जो दिल पे गुज़रती है वो समझा नहीं सकते

शकील बदायुनी

जल्वा-ए-हुस्न-ए-करम का आसरा करता हूँ मैं

शकील बदायुनी

जब कभी हम तिरे कूचे से गुज़र जाते हैं

शकील बदायुनी

हम हैं और उन की ख़ुशी है आज-कल

शकील बदायुनी

ग़म-ए-इश्क़ रह गया है ग़म-ए-जुस्तुजू में ढल कर

शकील बदायुनी

ग़म-ए-हयात भी आग़ोश-ए-हुस्न-ए-यार में है

शकील बदायुनी

दिल लज़्ज़त-ए-निगाह करम पा के रह गया

शकील बदायुनी

बीत गया हंगाम-ए-क़यामत रोज़-ए-क़यामत आज भी है

शकील बदायुनी

बे-कसी से मरने मरने का भरम रह जाएगा

शकील बदायुनी

बेकार गई आड़ तिरे पर्दा-ए-दर की

शकील बदायुनी

अभी जज़्बा-ए-शौक़ कामिल नहीं है

शकील बदायुनी

आँख से आँख मिलाता है कोई

शकील बदायुनी

आदाब-ए-आशिक़ी से बेगाना कह रही है

शकील बदायुनी

कब सुनी तुम ने रागनी मेरी

शाइस्ता सहर

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