विद्वान Poetry (page 10)

हमारे दिल के आईने में है तस्वीर नानक की

श्याम सुंदर लाल बर्क़

दिल फड़क जाएगा वो शोख़ जो ख़ंदाँ होगा

शऊर बलगिरामी

सातों आलम सर करने के बा'द इक दिन की छुट्टी ले कर

शुजा ख़ावर

जो तुम से पहले आए थे उन की कारिस्तानी देखो

शुजा ख़ावर

गरचे बादल पानी बरसाता हुआ घर घर फिरा

शुजा ख़ावर

लबों पे अब कोई आह-ओ-फ़ुग़ाँ नहीं होती

शोला हस्पानवी

साँस की आस निगहबाँ है ख़बर-दार रहो

शोहरत बुख़ारी

जाने किस किस की तवज्जोह का तमाशा देखा

शोहरत बुख़ारी

इन को देखा था कहीं याद नहीं

शोहरत बुख़ारी

दिल सख़्त निढाल हो गया है

शोहरत बुख़ारी

ऐश-ए-दुनिया का जब शुमार न था

शोहरत बुख़ारी

ख़ुशी में ग़म मिला लेते हैं थोड़ा

शोएब निज़ाम

तुझे दिल में बसाएँगे तिरे ही ख़्वाब देखेंगे

शमशाद शाद

नाज़ भला किस बात का तुझ को पास-ए-हुनर जब कुछ भी नहीं

शमशाद शाद

दिल पर सितम हज़ार करे बेवफ़ा के लब

शमशाद शाद

याद है अब तक मुझे अहद-ए-जवानी याद है

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

शाम-ए-ग़म की सहर न हो जाए

शिव रतन लाल बर्क़ पूंछवी

फिर मिरी आँख तिरी याद से भर आई है

शिव चरन दास गोयल ज़ब्त

मैं रूह-ए-आलम-ए-इम्काँ में शरह-ए-अज़्मत-ए-यज़्दाँ

शिबली नोमानी

पूछते क्या हो जो हाल-ए-शब-ए-तन्हाई था

शिबली नोमानी

होती है लबों पर ख़ामोशी आँखों में मोहब्बत होती है

शेवन बिजनौरी

ग़ज़ब है जुस्तजू-ए-दिल का ये अंजाम हो जाए

शेरी भोपाली

क़ुल्ज़ुम-ए-उल्फ़त में वो तूफ़ान का आलम हुआ

शेर सिंह नाज़ देहलवी

कसरत-ए-वहदानियत में हुस्न की तनवीर देख

शेर सिंह नाज़ देहलवी

आलम में हुस्न तेरा मशहूर जानते हैं

शेर मोहम्मद ख़ाँ ईमान

नुत्क़ पलकों पे शरर हो तो ग़ज़ल होती है

शेर अफ़ज़ल जाफ़री

बजा कहे जिसे आलम उसे बजा समझो

ज़ौक़

नहीं सबात बुलंदी-ए-इज्ज़-ओ-शाँ के लिए

ज़ौक़

न खींचो आशिक़-तिश्ना-जिगर के तीर पहलू से

ज़ौक़

मार कर तीर जो वो दिलबर-ए-जानी माँगे

ज़ौक़

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