बादल Poetry (page 4)

बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता

तहज़ीब हाफ़ी

बता ऐ अब्र मुसावात क्यूँ नहीं करता

तहज़ीब हाफ़ी

मेहवर पे भी गर्दिश मिरी मेहवर से अलग हो

तफ़ज़ील अहमद

किसी के हाथ में जाम-ए-शराब आया है

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

दौर-ए-तूफ़ाँ में भी जी लेते हैं जीने वाले

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

एक ही जाम को पिला साक़ी

ताबाँ अब्दुल हई

याद-ए-अय्याम कि हम-रुतबा-ए-रिज़वाँ हम थे

तअशशुक़ लखनवी

कब अपनी ख़ुशी से वो आए हुए हैं

तअशशुक़ लखनवी

जोश पर थीं सिफ़त-ए-अब्र-ए-बहारी आँखें

तअशशुक़ लखनवी

तजर्बात-ए-तल्ख़ ने हर-चंद समझाया मुझे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

गा रहा हूँ ख़ामुशी में दर्द के नग़्मात मैं

सय्यद ज़मीर जाफ़री

कलाम-ए-सख़्त कह कह कर वो क्या हम पर बरसते हैं

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

ज़मीन-ए-इश्क़ पे ऐ अब्र-ए-ए'तिबार बरस

सय्यद तम्जीद हैदर तम्जीद

मेरी निगह में यार मैं उस की निगाह में

सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी

दौर-ए-मय है मगर सुरूर नहीं

सय्यद मोहम्मद ज़फ़र अशक संभली

ब-हर-सूरत मोहब्बत का यही अंजाम देखा है

सय्यद मोहम्मद ज़फ़र अशक संभली

जब मैं रोया हूँ वो रोए हैं ये उल्फ़त मेरे साथ

सय्यद काज़िम अली शौकत बिलगिरामी

ये आँख तंज़ न हो ज़ख़्म-ए-दिल हरा न लगे

सय्यद अमीन अशरफ़

शौक़-ए-वारफ़्ता को मलहूज़-ए-अदब भी होगा

सय्यद अमीन अशरफ़

कुछ और कोई अब्र-ए-बहारी को न समझे

सय्यद अाग़ा अली महर

गुलज़ार-ए-वतन

सुरूर जहानाबादी

ख़्वाब देखता हूँ

सुरूर बाराबंकवी

ऐसा लगता है किसी गुम्बद से टकराई न थी

सूरज नारायण

मैं अब्र-ओ-बाद से तूफ़ाँ से सब से डरता हूँ

सुलतान रशक

हर इक लम्हा हमें हम से जुदा करती हुई सी

सुल्तान अख़्तर

दश्त में ये जाँ-फ़ज़ाँ मंज़र कहाँ से आ गए

सुलेमान ख़ुमार

सफ़र करो तो इक आलम दिखाई देता है

सुहैल अहमद ज़ैदी

सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई

सूफ़ी तबस्सुम

मुझ पर ऐ महरम-ए-जाँ पर्दा-ए-असरार कूँ खोल

सिराज औरंगाबादी

कल सीं बे-कल है मिरा जी यार कूँ देखा न था

सिराज औरंगाबादी

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