अंदर Poetry (page 6)

रूठ कर आँख के अंदर से निकल जाते हैं

तौक़ीर तक़ी

लफ़्ज़ की क़ैद से रिहा हो जा

तौक़ीर तक़ी

वो जो इक इल्ज़ाम था उस पर कहीं

तौक़ीर रज़ा

फ़क़ीरों का चलन यूँ जिस्म के अंदर महकता है

ताैफ़ीक़ साग़र

वो हम से क्यूँ अलग था क्यूँ दुखी था

तसव्वुर ज़ैदी

पागल वहशी तन्हा तन्हा उजड़ा उजड़ा दिखता हूँ

तरकश प्रदीप

ख़ुश्क आँखों से कहाँ तय ये मसाफ़त होगी

तारिक़ क़मर

कैसे रिश्तों को समेटें ये बिखरते हुए लोग

तारिक़ क़मर

ख़ुद से भी इक बात छुपाया करता हूँ

तनवीर सामानी

शहरों के सारे जंगल गुंजान हो गए हैं

तनवीर अंजुम

सफ़र और क़ैद में अब की दफ़अ' क्या हुआ

तनवीर अंजुम

इंतिज़ार

तनवीर अंजुम

शहरों के सारे जंगल गुंजान हो गए हैं

तनवीर अंजुम

जिस्म के अंदर सिसकता कौन है

तन्हा तिम्मापुरी

बात कुछ यूँ है कि ये ख़ौफ़ का मंज़र तो नहीं

तन्हा तिम्मापुरी

बस एक शय मिरे अंदर तमाम होती हुई

तालीफ़ हैदर

जी में आता है कि चल कर जंगलों में जा रहें

ताज सईद

बंद दरीचों के कमरे से पूर्वा यूँ टकराई है

ताज सईद

अजीब ख़्वाब था उस के बदन में काई थी

तहज़ीब हाफ़ी

ला-यख़ुल

तहसीन फ़िराक़ी

फ़क़त तुम ही नहीं नाराज़ मुझ से जान-ए-जानाँ

ताहिर अदीम

मुझे वो छोड़ कर जब से गया है इंतिहा है

ताहिर अदीम

मेहवर पे भी गर्दिश मिरी मेहवर से अलग हो

तफ़ज़ील अहमद

जहान-ए-दिल में सन्नाटा बहुत है

ताबिश मेहदी

अपनी साल-गिरह पर

ताबिश कमाल

बंद-ए-ग़म मुश्किल से मुश्किल-तर खुला

ताबिश देहलवी

ज़वाल की आख़िरी हिचकियाँ

तबस्सुम काश्मीरी

जिस्म के अंदर जिस्म के बाहर

तबस्सुम काश्मीरी

ए-के-शैख़ के पेट का कुत्ता

तबस्सुम काश्मीरी

कब अपनी ख़ुशी से वो आए हुए हैं

तअशशुक़ लखनवी

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