आंख Poetry (page 23)

होने की इक झलक सी दिखा कर चला गया

सईद अहमद

नहीं मा'लूम जीने का हुनर कैसा रखा है

सादिया सफ़दर सादी

यही नहीं कि फ़क़त तिरी जुस्तुजू भी मैं

सादिक़ नसीम

वो जिस का रंग सलोना है बादलों की तरह

सादिक़ नसीम

उदास उदास सर-ए-साग़र-ओ-सुबू भी मैं

सादिक़ नसीम

महक रहा है बदन सारा कैसी ख़ुशबू है

सादिक़ इंदौरी

गुज़रे हैं तेरे साथ जो दिन-रात अभी तक

सादिक़ा फ़ातिमी

तबीअत रफ़्ता रफ़्ता ख़ूगर-ए-ग़म होती जाती है

सदा अम्बालवी

दिखाएगी असर दिल की पुकार आहिस्ता आहिस्ता

सदा अम्बालवी

अब कहाँ दोस्त मिलें साथ निभाने वाले

सदा अम्बालवी

ये उम्र भर का सफ़र है इसी सहारे पर

साबिर वसीम

वो फूल था जादू-नगरी में जिस फूल की ख़ुश्बू भाई थी

साबिर वसीम

जो ख़्वाब मेरे नहीं थे मैं उन को देखता था

साबिर वसीम

देखो ऐसा अजब मुसाफ़िर फिर कब लौट के आता है

साबिर वसीम

तेरी याद मेरी भूल

साबिर दत्त

ख़्वाब

साबिर दत्त

सोना था जितना अहद-ए-जवानी में सो लिए

सबा अकबराबादी

इस रंग में अपने दिल-ए-नादाँ से गिला है

सबा अकबराबादी

ग़ालिबन मेरे अलावा कोई गुज़रा भी नहीं

सबा अकबराबादी

सामने उन को पाया तो हम खो गए आज फिर हसरत-ए-गुफ़्तुगू रह गई

सबा अफ़ग़ानी

किसी भी वहम को ख़ुद पर सवार मत करना

सादुल्लाह शाह

नाव काग़ज़ की सही कुछ तो नज़र से गुज़रे

सादुल्लाह कलीम

पुर-हौल ख़राबों से शनासाई मिरी है

रूही कंजाही

किसी भी काम का मेरा हुनर नहीं न सही

रूही कंजाही

जब कि सारी काएनात उस की निगहबानी में है

रोहित सोनी ‘ताबिश’

कोई ख़्वाब था जो बिखर गया कोई दर्द था जो ठहर गया

रिज़वानूरर्ज़ा रिज़वान

वीनस

रियाज़ लतीफ़

मुस्तक़बिल की आँख

रियाज़ लतीफ़

गाए

रियाज़ लतीफ़

सब ख़लाओं को ख़लाओं से भिगो सकता है

रियाज़ लतीफ़

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