आंख Poetry (page 56)

ज़िंदगी रोज़ बनाती है बहाने क्या क्या

अजमल सिद्दीक़ी

खुल के बरसना और बरस कर फिर खुल जाना देखा है

अजमल सिद्दीक़ी

दर्द-ए-मुसलसल से आहों में पैदा वो तासीर हुई

आजिज़ मातवी

धुआँ सिफ़त हूँ ख़लाओं का है सफ़र मुझ को

अजीत सिंह हसरत

फूलों में वो ख़ुशबू वो सबाहत नहीं आई

ऐतबार साजिद

ज़ेहन पर जब दर्द ख़ामोशी की चादर तानता है

ऐनुद्दीन आज़िम

सुर्ख़-रू सब को सर-ए-मक़्तल नज़र आने लगे

ऐनुद्दीन आज़िम

जो मैं ने कह दिया उस से मुकरने वाला नहीं

ऐनुद्दीन आज़िम

लहर से लहर का नाता क्या है

अहसन यूसुफ़ ज़ई

यहाँ बग़ैर-फ़ुग़ाँ शब बसर नहीं होती

अहसन मारहरवी

तुम्हारी लन-तरानी के करिश्मे देखे-भाले हैं

अहसन मारहरवी

संग-ए-दर बन कर भी क्या हसरत मिरे दिल में नहीं

अहसन मारहरवी

मुतमइन अपने यक़ीं पर अगर इंसाँ हो जाए

अहसन मारहरवी

चाहिए इश्क़ में इस तरह फ़ना हो जाना

अहसन मारहरवी

बाहम जो हुस्न ओ इश्क़ में याराना हो गया

अहसन मारहरवी

लहू-लुहान सा मंज़र हमारी आँख में है

अहसन इमाम अहसन

हमारा देस

अहमक़ फफूँदवी

वो फूल जो मुस्कुरा रहा है

अहमद ज़फ़र

आसमाँ की आँख सूरज चाँद बीनाई भी है

अहमद ज़फ़र

ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे

अहमद शनास

ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे

अहमद शनास

मिरी आँखों में आ दिल में उतर पैवंद-ए-जाँ हो जा

अहमद शनास

नए ज़मानों की चाप तो सर पे आ खड़ी थी

अहमद शहरयार

दियों से वा'दे वो कर रही थी अजीब रुत थी

अहमद सज्जाद बाबर

ये दास्तान-ए-ग़म-ए-दिल कहाँ कही जाए

अहमद राही

कोई हसरत भी नहीं कोई तमन्ना भी नहीं

अहमद राही

रेस्तोराँ

अहमद नदीम क़ासमी

पत्थर

अहमद नदीम क़ासमी

उम्र भर उस ने इसी तरह लुभाया है मुझे

अहमद नदीम क़ासमी

होती है शाम आँख से आँसू रवाँ हुए

अहमद मुश्ताक़

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