आवाज Poetry (page 15)

नज़्म

सईदुद्दीन

दस्ताने

सईदुद्दीन

किश्त-ए-दयार-ए-सुब्ह से तारे उगाऊँ मैं

सईद शरीक़

देख पाए तो करे कोई पज़ीराई भी

सईद शरीक़

अपनी आवाज़ सुनाई नहीं देती मुझ को

सईद क़ैस

रोज़ हवा में उड़ने की फ़रमाइश है

सईद क़ैस

हिज्र तन्हाई के लम्हों में बहुत बोलता है

सईद क़ैस

सुलग रहा है चमन में बहार का मौसम

सईद अहमद अख़्तर

ये हादसा भी तो कुछ कम न था सबा के लिए

सईद अहमद अख़्तर

जब समाअत तिरी आवाज़ तलक जाती है

सईद अहमद

जो लब पे न लाऊँ वही शे'रों में कहूँ मैं

सादिक़ नसीम

'बेदिल' का तख़य्युल हूँ न ग़ालिब की नवा हूँ

सादिक़ नसीम

फ़र्जाम

सादिक़

रस्म-ए-दुनिया तो किसी तौर निभाते जाओ

सदा अम्बालवी

खिले हुए हैं फूल सितारे दरिया के उस पार

साबिर वसीम

अगर अल्फ़ाज़ से ग़म का इज़ाला हो गया होता

सबीला इनाम सिद्दीक़ी

क़लम से राब्ता-ए-रंग-ओ-आब टूट गया

सबा नक़वी

नग़्मा-ज़न है नज़र-ए-बे-आवाज़

सबा नक़वी

यगाना बन के हो जाए वो बेगाना तो क्या होगा

सबा अकबराबादी

कारवाँ लुट गया राहबर छुट गया रात तारीक है ग़म का यारा नहीं

सबा अफ़ग़ानी

चैन घर में न कभी तेरे नगर में पाऊँ

रूही कंजाही

अपनी मर्ज़ी ही करोगे तुम भी

रूही कंजाही

मुस्तक़बिल की आँख

रियाज़ लतीफ़

एक रोते हुए आदमी को देख कर

रियाज़ लतीफ़

चमगादड़

रियाज़ लतीफ़

मैं वहाँ हूँ कि नहीं चाहे तो जा कर देखे

रियाज़ लतीफ़

घर में पहुँचा था कि आई नज्द से आवाज़-ए-क़ैस

रियाज़ ख़ैराबादी

आलम-ए-हू में कुछ आवाज़ सी आ जाती है

रियाज़ ख़ैराबादी

नज़र आती है दूर की सूरत

रियाज़ ख़ैराबादी

मुँह ज़ेर-ए-ताक खोला वाइज़ बहुत ही चूका

रियाज़ ख़ैराबादी

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