बात Poetry (page 111)

तुम कहाँ वस्ल कहाँ वस्ल की उम्मीद कहाँ

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

मिलना न मिलना ये तो मुक़द्दर की बात है

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

लो हम बताएँ ग़ुंचा-ओ-गुल में है फ़र्क़ क्या

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

इक बात कहें तुम से ख़फ़ा तो नहीं होगे

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

दिल सर्द हो गया है तबीअत बुझी हुई

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

ये खुले खुले से गेसू इन्हें लाख तू सँवारे

आग़ा हश्र काश्मीरी

गो हवा-ए-गुलसिताँ ने मिरे दिल की लाज रख ली

आग़ा हश्र काश्मीरी

गो हरम के रास्ते से वो पहुँच गए ख़ुदा तक

आग़ा हश्र काश्मीरी

सू-ए-मय-कदा न जाते तो कुछ और बात होती

आग़ा हश्र काश्मीरी

तिरे वास्ते जान पे खेलेंगे हम ये समाई है दिल में ख़ुदा की क़सम

आग़ा हज्जू शरफ़

किस के हाथों बिक गया किस के ख़रीदारों में हूँ

आग़ा हज्जू शरफ़

जश्न था ऐश-ओ-तरब की इंतिहा थी मैं न था

आग़ा हज्जू शरफ़

जब से हुआ है इश्क़ तिरे इस्म-ए-ज़ात का

आग़ा हज्जू शरफ़

आलम में हरे होंगे अश्जार जो मैं रोया

आग़ा हज्जू शरफ़

नौजवानी में अजब दिल की लगी होती है

अफ़ज़ल पेशावरी

जो दर्द-ए-दिल कहो आहिस्ता बोलो

अफ़ज़ल परवेज़

मकान-ए-ख़्वाब में जंगल की बास रहने लगी

अफ़ज़ाल नवेद

बाग़ क्या क्या शजर दिखाते हैं

अफ़ज़ाल नवेद

अपने ही तले आई ज़मीनों से निकल कर

अफ़ज़ाल नवेद

उस पेड़ को छुआ तो समर-दार हो गया

अफ़ज़ल मिनहास

काँच की ज़ंजीर टूटी तो सदा भी आएगी

अफ़ज़ल मिनहास

शिकस्त-ए-ज़िंदगी वैसे भी मौत ही है ना

अफ़ज़ल ख़ान

सब को बता रहा हूँ यही साफ़ साफ़ मैं

अफ़ज़ल गौहर राव

सुलगती रेत पे तहरीर जो कहानी है

अफ़ज़ल इलाहाबादी

जो मिरी आरज़ू नहीं करता

अफ़ज़ल इलाहाबादी

पयाम-ए-आश्ती इक ढोंग दोस्ती का था

आफ़ताब शम्सी

गो सुध नहीं उस शोख़ सितमगर ने सँभाली

आफ़ताब शाह आलम सानी

घर ग़ैर के जो यार मिरा रात से गया

आफ़ताब शाह आलम सानी

पते की बात भी मुँह से निकल ही जाती है

आफ़ताब हुसैन

दिलों के बाब में क्या दख़्ल 'आफ़्ताब-हुसैन'

आफ़ताब हुसैन

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