बात Poetry (page 99)

ज़िंदगी एक सज़ा हो जैसे

अमीन राहत चुग़ताई

मिरे बदन से कभी आँच इस तरह आए

अमीन राहत चुग़ताई

दिल की हर बात तिरी मुझ को बता देती है

अम्बर जोशी

वहशत

अम्बरीन सलाहुद्दीन

खिड़की

अम्बरीन सलाहुद्दीन

जो रही सो बे-ख़बरी रही

अम्बरीन सलाहुद्दीन

उस के ध्यान की दिल में प्यास जगा ली जाए

अम्बरीन सलाहुद्दीन

रस्ता रोकती ख़ामोशी ने कौन सी बात सुनानी है

अम्बरीन सलाहुद्दीन

ख़ुशी का लम्हा रेत था सो हाथ से निकल गया

अंबरीन हसीब अंबर

इस आरज़ी दुनिया में हर बात अधूरी है

अंबरीन हसीब अंबर

हो गई बात पुरानी फिर भी

अंबरीन हसीब अंबर

बहते हुए अश्कों की रवानी नहीं लिक्खी

अंबरीन हसीब अंबर

मुश्किल को समझने का वसीला निकल आता

अम्बर खरबंदा

हर इक नदी से कड़ी प्यास ले के वो गुज़रा

अम्बर बहराईची

एक रियाज़त ये भी

अम्बर बहराईची

गुलाब था न कँवल फिर बदन वो कैसा था

अम्बर बहराईची

उलझा दिल-ए-सितम-ज़दा ज़ुल्फ़-ए-बुताँ से आज

अमानत लखनवी

लुत्फ़ अब ज़ीस्त का ऐ गर्दिश-ए-अय्याम नहीं

अमानत लखनवी

सबा की बात सुनें फूल से कलाम करें

अल्ताफ़ परवाज़

ईंट दीवार से जब कोई खिसक जाती है

अल्ताफ़ परवाज़

हम जिस पे मर रहे हैं वो है बात ही कुछ और

अल्ताफ़ हुसैन हाली

नशात-ए-उमीद

अल्ताफ़ हुसैन हाली

हुब्ब-ए-वतन

अल्ताफ़ हुसैन हाली

है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूब-तर कहाँ

अल्ताफ़ हुसैन हाली

दिल से ख़याल-ए-दोस्त भुलाया न जाएगा

अल्ताफ़ हुसैन हाली

अब वो अगला सा इल्तिफ़ात नहीं

अल्ताफ़ हुसैन हाली

आगे बढ़े न क़िस्सा-ए-इश्क़-ए-बुताँ से हम

अल्ताफ़ हुसैन हाली

जाने किस बात से दुखा है बहुत

आलोक मिश्रा

उन की आमद है गुल-फ़िशानी है

आलोक मिश्रा

साल ये कौन सा नया है मुझे

आलोक मिश्रा

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