बदन Poetry (page 9)

सनम हज़ार हुआ तो वही सनम का सनम

सिराज औरंगाबादी

माइल हूँ गुल-बदन का मुझे गुल सीं क्या ग़रज़

सिराज औरंगाबादी

क्या बला सेहर हैं सजन के नयन

सिराज औरंगाबादी

कहाँ है गुल-बदन मोहन पियारा

सिराज औरंगाबादी

काफ़िर हुआ हूँ रिश्ता-ए-ज़ुन्नार की क़सम

सिराज औरंगाबादी

जिस कूँ तुझ ग़म सीं दिल-शिगाफ़ी है

सिराज औरंगाबादी

जलव-ए-जाँ-फ़ज़ा दिखाता रह

सिराज औरंगाबादी

हम हैं मुश्ताक़-ए-जवाब और तुम हो उल्फ़त सीं बईद

सिराज औरंगाबादी

दिन-ब-दिन अब लुत्फ़ तेरा हम पे कम होने लगा

सिराज औरंगाबादी

दिलदार की कशिश ने ऐंचा है मन हमारा

सिराज औरंगाबादी

दिल में ख़यालात-ए-रंगीं गुज़रते हैं जिऊँ बॉस फूलों के रंगों में रहिए

सिराज औरंगाबादी

ऐ दिल-ए-बे-अदब उस यार की सौगंद न खा

सिराज औरंगाबादी

रंग लाया दिवाना-पन मेरा

सिकंदर अली वज्द

हसीं यादों से ख़ल्वत अंजुमन है

सिकंदर अली वज्द

तअ'ल्लुक़ की ना-जाएज़ तजावुज़ात

सिदरा सहर इमरान

सब्र-आज़मा

सिदरा सहर इमरान

ना-ख़लफ़ मिज़ाज की मुसद्दक़ा तस्लीमात

सिदरा सहर इमरान

जहन्नम से पहले जहन्नम

सिदरा सहर इमरान

बा-इज़्ज़त तरीक़े से जीने के जतन

सिदरा सहर इमरान

जागते दिन की गली में रात आँखें मल रही है

सिदरा सहर इमरान

हवा-ए-इश्क़ में शामिल हवस की लू ही रही

सिद्दीक़ अफ़ग़ानी

हवा चली तो पसीना रगों में बैठ गया

सिद्दीक़ अफ़ग़ानी

हर चंद कि प्यारा था मैं सूरज की नज़र का

सिद्दीक़ अफ़ग़ानी

ग़ाज़ा तो तिरा उतर गया था

सिद्दीक़ अफ़ग़ानी

बुल-हवस में भी न था वो बुत भी हरजाई न था

सिद्दीक़ अफ़ग़ानी

फ़ुग़ान-ए-रूह कोई किस तरह सुनाए उसे

सिद्दीक़ शाहिद

मुसाफ़िरों में अभी तल्ख़ियाँ पुरानी हैं

सिब्त अली सबा

मल्बूस जब हवा ने बदन से चुरा लिए

सिब्त अली सबा

ऐ रश्क-ए-महर कोई भी तुझ सा हसीं नहीं

श्याम सुंदर लाल बर्क़

उर्यां न वो नहाया हम्माम हो कि दरिया

शऊर बलगिरामी

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