बिहार Poetry (page 14)

है अब की फ़स्ल में रंग बहार और ही कुछ

शानुल हक़ हक़्क़ी

मुद्दत से ढूँडती है किसी की नज़र मुझे

शाद अमृतसरी

कभी तलाश न ज़ाए न राएगाँ होगी

शाद आरफ़ी

अहद-ए-मायूसी जहाँ तक साज़गार आता गया

शाद आरफ़ी

अभी तो मौसम-ए-ना-ख़ुश-गवार आएगा

शाद आरफ़ी

कौन दरवाज़ा खुला रखता बराए इंतिज़ार

सीमाब ज़फ़र

फिर आ गया ज़बाँ पे वही नाम क्या करें

सीमाब सुल्तानपुरी

मेहमाँ को घर में आए ज़माना गुज़र गया

सीमाब सुल्तानपुरी

जब भी भूले से कभी लब पे हँसी आई है

सीमाब सुल्तानपुरी

सुबू पर जाम पर शीशे पे पैमाने पे क्या गुज़री

सीमाब अकबराबादी

शायद जगह नसीब हो उस गुल के हार में

सीमाब अकबराबादी

मेरी रिफ़अत पर जो हैराँ है तो हैरानी नहीं

सीमाब अकबराबादी

ख़ुद उठ के हाथ मेरे गरेबाँ में आ गए

सीमाब अकबराबादी

हस्ती को मिरी मस्ती-ए-पैमाना बना दे

सीमाब अकबराबादी

फूलों को शर्मसार किया है कभी कभी

सय्यद जहीरुद्दीन ज़हीर

महफ़िल-ए-दोस्त में गो सीना-फ़िगार आए हैं

सय्यद एहतिशाम हुसैन

साक़ी गई बहार रही दिल में ये हवस

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कहियो सबा सलाम हमारा बहार से

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ग़ुंचे से मुस्कुरा के उसे ज़ार कर चले

मोहम्मद रफ़ी सौदा

धूम से सुनते हैं अब की साल आती है बहार

मोहम्मद रफ़ी सौदा

देखे बुलबुल जो यार की सूरत

मोहम्मद रफ़ी सौदा

दामन सबा न छू सके जिस शह-सवार का

मोहम्मद रफ़ी सौदा

साक़ी की हर निगाह में सहबा थी जाम था

सत्यपाल जाँबाज़

कैसी है ये बहार मुक़द्दर की बात है

सत्यपाल जाँबाज़

हमारे दिल में मचलेगी किसी की आरज़ू कब तक

सत्यपाल जाँबाज़

यार की महफ़िल सजी मय की महक छाने लगी

सरवर नेपाली

ऐ ख़्वाब-ए-दिल-नवाज़ न आ कर सता मुझे

सरवर नेपाली

हुस्न-ए-बहार मुझ को मुकम्मल नहीं लगा

सरवत हुसैन

थामी हुई है काहकशाँ अपने हाथ से

सरवत हुसैन

देखा जो उस तरफ़ तो बदन पर नज़र गई

सरवत हुसैन

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