बिहार Poetry (page 18)

ये सैल-ए-अश्क मुझे गुफ़्तुगू की ताब तो दे

सबिहा सबा, न्यूयार्क

क़लम से राब्ता-ए-रंग-ओ-आब टूट गया

सबा नक़वी

तुझ से दामन-कशाँ नहीं हूँ मैं

सबा अकबराबादी

सोना था जितना अहद-ए-जवानी में सो लिए

सबा अकबराबादी

अश्क-बारी नहीं फ़ुर्क़त में शरर-बारी है

सबा अकबराबादी

कारवाँ लुट गया राहबर छुट गया रात तारीक है ग़म का यारा नहीं

सबा अफ़ग़ानी

वफ़ा का बंदा हूँ उल्फ़त का पासदार हूँ मैं

साइल देहलवी

बसा-औक़ात आ जाते हैं दामन से गरेबाँ में

साइल देहलवी

किसी भी वहम को ख़ुद पर सवार मत करना

सादुल्लाह शाह

मुँह-ज़ोर आरज़ूओं की बे-मेहरियाँ न पूछ

रूही कंजाही

उसी हसीं से चमन में बहार आज भी है

रोहित सोनी ‘ताबिश’

ज़बान पे नाला-ओ-फ़रियाद के सिवा क्या है

रिज़वानूरर्ज़ा रिज़वान

ये कोई बात है सुनता न बाग़बाँ मेरी

रियाज़ ख़ैराबादी

वो गुल हैं न उन की वो हँसी है

रियाज़ ख़ैराबादी

रंग पर कल था अभी लाला-ए-गुलशन कैसा

रियाज़ ख़ैराबादी

रहे हम आशियाँ में भी तो बर्क़-ए-आशियाँ हो कर

रियाज़ ख़ैराबादी

मुँह ज़ेर-ए-ताक खोला वाइज़ बहुत ही चूका

रियाज़ ख़ैराबादी

गुल मुरक़्क़ा' हैं तिरे चाक गरेबानों के

रियाज़ ख़ैराबादी

दर खुला सुब्ह को पौ फटते ही मय-ख़ाने का

रियाज़ ख़ैराबादी

आप आए तो ख़याल-ए-दिल-ए-नाशाद आया

रियाज़ ख़ैराबादी

क्या सुन चुके हैं आमद-ए-फ़स्ल-ए-बहार हाथ

रिन्द लखनवी

यार आया है अहवाल-ए-दिल-ए-ज़ार दिखाओ

रिन्द लखनवी

वक़ार-ए-शाह-ए-ज़विल-इक्तदार देख चुके

रिन्द लखनवी

क़ब्र पर होवें दो न चार दरख़्त

रिन्द लखनवी

हैरान सी है भचक रही है

रिन्द लखनवी

एक बे-रंग से ग़ुबार में हूँ

रिफ़अत सरोश

ये जो मुझ पर निखार है साईं

रहमान फ़ारिस

किसी की चश्म-ए-गुरेज़ाँ में जल बुझे हम लोग

रेहाना रूही

चुपके से मुझ को आज कोई ये बता गया

रज़ी रज़ीउद्दीन

अब भी उसी तरह से इसे इंतिज़ार है

रज़ी रज़ीउद्दीन

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.