बिहार Poetry (page 17)

इस बे तुलूअ' शब में क्या तालेअ'-आज़माई

सहबा अख़्तर

दोहराऊँ क्या फ़साना-ए-ख़्वाब-ओ-ख़याल को

सहबा अख़्तर

असनाम-ए-माल-ओ-ज़र की परस्तिश सिखा गई

सहबा अख़्तर

असनाम-ए-माल-ओ-ज़र की परस्तिश सिखा गई

सहबा अख़्तर

कब तलक हमारी सई-ए-अमल राएगाँ रहे

सग़ीर अहमद सूफ़ी

तुम गए रौनक़-ए-बहार गई

साग़र सिद्दीक़ी

मुस्कुराओ बहार के दिन हैं

साग़र सिद्दीक़ी

ऐ दिल-ए-बे-क़रार चुप हो जा

साग़र सिद्दीक़ी

ज़ख़्म-ए-दिल पर बहार देखा है

साग़र सिद्दीक़ी

तेरी नज़र का रंग बहारों ने ले लिया

साग़र सिद्दीक़ी

नज़र नज़र बे-क़रार सी है नफ़स नफ़स में शरार सा है

साग़र सिद्दीक़ी

मुस्कुराओ बहार के दिन हैं

साग़र सिद्दीक़ी

मता-ए-कौसर-ओ-ज़मज़म के पैमाने तिरी आँखें

साग़र सिद्दीक़ी

ऐ दिल-ए-बे-क़रार चुप हो जा

साग़र सिद्दीक़ी

गुल अपने ग़ुंचे अपने गुल्सिताँ अपना बहार अपनी

साग़र निज़ामी

होली

साग़र निज़ामी

बैठे हैं ऐसे ज़ुल्फ़ में कलियाँ सँवार के

साग़र ख़य्यामी

रोना मुझे ख़िज़ाँ का नहीं कुछ मगर 'शमीम'

सफ़िया शमीम

वो हसरत-ए-बहार न तूफ़ान-ए-ज़िंदगी

सफ़िया शमीम

दुरुस्त है कि मिरा हाल अब ज़ुबूँ भी नहीं

सफ़दर मीर

बग़ौर देखो तो ज़ख़्मों का इक चमन सा है

सफ़दर मीर

चाहे हमारा ज़िक्र किसी भी ज़बाँ में हो

सईद नक़वी

सुलग रहा है चमन में बहार का मौसम

सईद अहमद अख़्तर

ये हादसा भी तो कुछ कम न था सबा के लिए

सईद अहमद अख़्तर

हैरत-ए-पैहम हुए ख़्वाब से मेहमाँ तिरे

सईद अहमद

करे रश्क-ए-गुलिस्ताँ दिल को 'फ़ाएज़'

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

मिरा महबूब सब का मन हरन है

सदरुद्दीन मोहम्मद फ़ाएज़

उदास उदास सर-ए-साग़र-ओ-सुबू भी मैं

सादिक़ नसीम

वो क्यूँ न रूठता मैं ने भी तो ख़ता की थी

साबिर ज़फ़र

मौसमों का जवाब दे दीजे

साबिर दत्त

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