बिहार Poetry (page 20)

हम जूँ चकोर ग़श हैं अजी एक यार पर

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

कुछ इस अदा से सफ़ीरान-ए-नौ-बहार चले

रम्ज़ अज़ीमाबादी

हम तो दिन-रात इसी सोच में मर जाएँगे

राम नाथ असीर

फिर भीग चलीं आँखें चलने लगी पुर्वाई

राम कृष्ण मुज़्तर

मुस्तक़िल दीद की ये शक्ल नज़र आई है

राम कृष्ण मुज़्तर

मिरी निगाह में ये रंग-ए-सोज़-ओ-साज़ न हो

राम कृष्ण मुज़्तर

मसअला ये भी ब-फ़ैज़-ए-इश्क़ आसाँ हो गया

राम कृष्ण मुज़्तर

बहारें और वो रंगीं नज़ारे याद आते हैं

राम कृष्ण मुज़्तर

क़फ़स पे बर्क़ गिरे और चमन को आग लगे

राम अवतार गुप्ता मुज़्तर

दिए जला के हवाओं के मुँह पे मार आया

रख़शां हाशमी

ये ज़रा सा कुछ और एक-दम बे-हिसाब सा कुछ

राजेन्द्र मनचंदा बानी

ग़ाएब हर मंज़र मेरा

राजेन्द्र मनचंदा बानी

या ख़ुदा अब के ये किस रंग में आई है बहार

राजेश रेड्डी

ज़िंदगी तू ने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं

राजेश रेड्डी

ग़म को दिल का क़रार कर लिया जाए

राजेश रेड्डी

क्या ग़ज़ब है कि चार आँखों में

रजब अली बेग सुरूर

इस तरह आह कल हम उस अंजुमन से निकले

रजब अली बेग सुरूर

क़स्र-ए-वीराँ

राजा मेहदी अली ख़ाँ

नख़्ल-ए-उमीद-ओ-आरज़ू बे-बर्ग-ओ-बार है

राज कुमार सूरी नदीम

सभी अंधेरे समेटे हुए पड़े रहना

रईस सिद्दीक़ी

शमीम-ए-गेसू-ए-मुश्कीन-ए-यार लाई है

रईस अमरोहवी

सफ़र में कोई रुकावट नहीं गदा के लिए

रईस अमरोहवी

राज़-ए-गिरफ़्तगी न असीर-ए-लहन से पूछ

रईस अमरोहवी

दीदनी है बहार का मंज़र

रईस अमरोहवी

दब गईं मौजें यकायक जोश में आने के बा'द

रहमत इलाही बर्क़ आज़मी

बे-नाम सी ख़लिश कि जो दिल में जिगर में है

राही शहाबी

कहाँ न-जाने चला गया इंतिज़ार कर के

इरफ़ान सत्तार

न मैं हाल-ए-दिल से ग़ाफ़िल न हूँ अश्क-बार अब तक

इरफ़ान अहमद मीर

न मैं हाल-ए-दिल से ग़ाफ़िल न हूँ अश्क-बार अब तक

इरफ़ान अहमद मीर

हम बाग़-ए-तमन्ना में दिन अपने गुज़ार आए

इरम लखनवी

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