दूर Poetry (page 22)
बदल जाएगा सब कुछ ये तमाशा भी नहीं होगा
शहराम सर्मदी
आदाब ज़िंदगी से बहुत दूर हो गया
शहूद आलम आफ़ाक़ी
तेरी तख़्लीक़ तिरा रंग हवाला था मिरा
शहनवाज़ ज़ैदी
दरीचा आइने पर खुल रहा है
शहनवाज़ ज़ैदी
उसे जब भी देखा बहुत ध्यान से
शाहिदा तबस्सुम
जंगलों में बारिशें हैं दूर तक
शाहिदा तबस्सुम
सारे पत्थर और आईने एक से लगते हैं
शाहिदा हसन
हर इरादा मुज़्महिल हर फ़ैसला कमज़ोर था
शाहिद मीर
वक़्फ़ा
शाहिद माहुली
सह-पहर ही से कोई शक्ल बनाती है ये शाम
शाहिद लतीफ़
भर गए ज़ख़्म तो क्या दर्द तो अब भी कोई है
शाहिद कमाल
मैं इंतिहा-ए-यास में तन्हा खड़ा रहा
शाहिद कलीम
लहू का दाग़ न था ज़ख़्म का निशान न था
शाहिद कलीम
कुछ देर काली रात के पहलू में लेट के
शाहिद कबीर
फिर उसी शोख़ की तस्वीर उतर आई है
शाहिद इश्क़ी
लुत्फ़ से तेरे सिवा दर्द महक जाता है
शाहिद इश्क़ी
कुछ अपनी बात कहो कुछ मिरी सुनो मत सो
शाहिद इश्क़ी
कभी ग़मी के नाम पर कभी ख़ुशी की आड़ में
शाहिद फ़रीद
उड़ता हुआ इक बादल था
शाहिद अज़ीज़
सजाएँ महफ़िल-ए-याराँ न शग़्ल-ए-जाम करें
शाहिद अख़्तर
वो बे-नियाज़ शब-ओ-रोज़-ओ-माह-ओ-साल गया
शाहिद अहमद शोएब
रंग-ए-नज़र से हुस्न-ए-तमन्ना निखार के
शाहीन सिद्दीक़ी
थी कुछ न ख़ता फिर भी पशेमान रहे हैं
शाहीन ग़ाज़ीपुरी
क़ुबूल है ग़म-ए-दुनिया तिरे हवाले से
शाहीन ग़ाज़ीपुरी
ख़ुद अपने ज़हर को पीना बड़ा करिश्मा है
शाहीन ग़ाज़ीपुरी
दिल जहाँ भी डूबा है उन की याद आई है
शाहीन ग़ाज़ीपुरी
कुछ नहीं लिक्खा हुआ फिर भी पढ़ा जाता है क्या
शाहीन अब्बास
साअत-ए-आसूदगी देखे हुए अर्सा हुआ
शहबाज़ नदीम ज़ियाई
ख़ाक-ज़ादा हूँ मगर ता-ब फ़लक जाता है
शहबाज़ ख़्वाजा
तस्ख़ीर-ए-फ़ितरत के बअ'द
शहाब जाफ़री
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