दूर Poetry (page 23)

शहर-ए-अना में

शहाब जाफ़री

हवस-ए-ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर लिए बैठे हैं

शहाब जाफ़री

मेरा उस का साथ

शहाब अख़्तर

जूँ मौज हाथ मारिए क्या बहर-ए-इश्क़ में

शाह नसीर

दे मुझ को भी इस दौर में साक़ी सिपर-ए-जाम

शाह नसीर

तिरे है ज़ुल्फ़ ओ रुख़ की दीद सुब्ह-ओ-शाम आशिक़ का

शाह नसीर

शब जो रुख़-ए-पुर-ख़ाल से वो बुर्के को उतारे सोते हैं

शाह नसीर

निकहत-ए-गुल हैं या सबा हैं हम

शाह नसीर

जब तलक चर्ब न जूँ शम्-ए-ज़बाँ कीजिएगा

शाह नसीर

फ़ुर्सत एक दम की है जूँ हबाब पानी याँ

शाह नसीर

बे-मेहर-ओ-वफ़ा है वो दिल-आराम हमारा

शाह नसीर

इश्क़ के अक़्लीम में चाल-ओ-चलन कुछ और है

शाह आसिम

मुज़्तरिब हैं सभी तक़दीर बदलने के लिए

सगुफ़ता यासमीन

क़फ़स में रह के गुल-ओ-नस्तरन की बात करो

शाग़िल क़ादरी

शक़ आफ़ियत-कनार किनारे को कर गई

शफ़क़त तनवीर मिर्ज़ा

हम ने तो यही मा'रका मारा है सफ़र में

शफ़क़त तनवीर मिर्ज़ा

जो ब-ईं ग़म भी शादमाँ गुज़री

शफ़क़त काज़मी

मौसम-ए-गुल है न दौर-जाम-ओ-सहबा रह गया

शफ़ीक़ जौनपुरी

कली पर मुस्कुराहट आज भी मालूम होती है

शफ़ीक़ जौनपुरी

जैसे सुब्ह को सूरज निकले शाम ढले छुप जाए है

शफ़ीक़ देहलवी

ख़स-ओ-ख़ाशाक-ए-बदन शाम-ए-क़ज़ा से रौशन

शफ़क़ सुपुरी

ख़स-ओ-ख़ाशाक-ए-बदन शाम-ए-क़ज़ा से रौशन

शफ़क़ सुपुरी

दम-ए-ता'मीर तख़रीब-ए-जहाँ कुछ और कहती है

शायर फतहपुरी

लिल्लाह कोई कोशिश न करे उल्फ़त में मुझे समझाने की

शादाँ इंदौरी

जान जोखिम से किए सर जो मराहिल तू ने

शादाब उल्फ़त

गले लगाए रहा सब का ध्यान था इतना

शाद शाद नूही

लब-ब-लब बिंत-उल-अनब हर-दम रहे

शाद लखनवी

जान या दिल नज़्र करना चाहिए

शाद लखनवी

हस्ती-ओ-अदम में नफ़स-ए-चंद बशर के

शाद लखनवी

बोलना बादा-कशों से न ज़रा ऐ वाइज़

शाद लखनवी

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