दूर Poetry (page 35)

हम उन को हाल-ए-दिल अपना सुनाए जाते हैं

रौनक़ टोंकवी

रात की सारी हक़ीक़त दिन में उर्यां हो गई

रौनक़ रज़ा

देख उफ़ुक़ के पीले-पन में दूर वो मंज़र डूब गया

रौनक़ रज़ा

बेहतर है अब दूर रहो तुम टेसू के इन फूलों से

रौनक़ नईम

ना-तवानी में भी वो किरदार होना चाहिए

रौनक़ नईम

क़रीब भी तो नहीं हो कि आ के सो जाओ

रउफ़ रज़ा

धरती से दूर हैं न क़रीब आसमाँ से हम

रऊफ़ ख़ैर

सुब्ह-नुशूर क्यूँ मिरी आँखों में नूर आ गया

रसूल साक़ी

शौक़ से आए बुरा वक़्त अगर आता है

रसूल साक़ी

मिरी दिन के उजालों पर नज़र है

रसूल साक़ी

वो अहल-ए-कहफ़ थे जिन को ज़िया मिली आख़िर

रासिख़ इरफ़ानी

किसी दराज़ में रखना कि ताक़ पर रखना

रासिख़ इरफ़ानी

ये आँसू किस लिए रुकता नहीं है

राशिद राही

महफ़िल में तो बस वो सज रहा है

राशिद मुफ़्ती

उर्दू

राशिद बनारसी

जंगल की लकड़ियाँ

राशिद अनवर राशिद

नज़र से दूर रहे मुझ को आज़माए भी

राशिद अनवर राशिद

आबला

राशिद आज़र

वही तअल्लुक़-ए-ख़ातिर जो बर्क़-ओ-बाद में है

राशिद आज़र

सदियों से मैं इस आँख की पुतली में छुपा था

रशीद क़ैसरानी

सदियों से मैं इस आँख की पुतली में छुपा था

रशीद क़ैसरानी

कुछ साए से हर लहज़ा किसी सम्त रवाँ हैं

रशीद क़ैसरानी

कुछ साए से हर लहज़ा किसी सम्त रवाँ हैं

रशीद क़ैसरानी

गाता रहा है दूर कोई हीर रात भर

रशीद क़ैसरानी

शुरूअ' अहल-ए-मोहब्बत के इम्तिहान हुए

रशीद लखनवी

जिस को आदत वस्ल की हो हिज्र से क्यूँकर बने

रशीद लखनवी

ये किस को जाग जाग के तारों की छाँव में

रशीद कौसर फ़ारूक़ी

आँसू की तरह पोंछ के फेंका गया हूँ मैं

रशीद कौसर फ़ारूक़ी

गए दिनों की मुसाफ़िरत का ब-यक-क़लम इश्तिहार लिखना

रशीद एजाज़

पी के कर लेता हूँ तौबा जब से ये दस्तूर है

रसा रामपुरी

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