दूर Poetry (page 9)

बुलबुल वो गुल है ख़्वाब में तू गा के मत जगा

वलीउल्लाह मुहिब

ऐ हम-नफ़स उस ज़ुल्फ़ के अफ़्साने को मत छेड़

वलीउल्लाह मुहिब

घर यार का हम से दूर पड़ा गई हम से राहत एक तरफ़

वली उज़लत

जामा-ज़ेबों को क्यूँ तजूँ कि मुझे

वली मोहम्मद वली

अब नींद कहाँ आँखों में शोला सा भरा है

वकील अख़्तर

नादान होशियार बने जिन के रूप से

वाजिद सहरी

ज़ोहरा सुहैल शम्स ख़ुर बद्र बहा तू कौन है

वाजिद अली शाह अख़्तर

लबालब कर दे ऐ साक़ी है ख़ाली मेरा पैमाना

वाजिद अली शाह अख़्तर

जा बैठते हो ग़ैरों में ग़ैरत नहीं आती

वाजिद अली शाह अख़्तर

बुतो ख़ुदा से डरो संग दिल सिवा न करो

वाजिद अली शाह अख़्तर

मोहब्बत के तआ'क़ुब में थकन से चूर होने तक

वजीह सानी

रात क़ातिल की गली हो जैसे

वजद चुगताई

चाहतों की जो दिल को आदत है

वजद चुगताई

क्या है कि आज चलते हो कतरा के राह से

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

उफ़ गर्दिश-ए-हयात तिरी फ़ित्ना-साज़ियाँ

वाहिद प्रेमी

हर एक गाम पे सज्दा यहाँ रवा होगा

वहीदा नसीम

मावरा

वहीद अख़्तर

रहे वो ज़िक्र जो लब-हा-ए-आतिशीं से चले

वहीद अख़्तर

शाम के दिन रात

वहीद अहमद

हैं किस लिए उदास कोई पूछता नहीं

विश्वनाथ दर्द

ज़र्रों की बातों में आने वाला था

विकास शर्मा राज़

न हम-सफ़र है न हम-नवा है

विकास शर्मा राज़

नम आँखों में क्या कर लेगा ग़ुस्सा देखेंगे

विजय शर्मा अर्श

अंदरूँ नींद का इक ख़ाली मकाँ होता था

वसाफ़ बासित

तवील ख़ामुशी

वर्षा गोरछिया

सहेली

वर्षा गोरछिया

खोए हुए सहरा तक ऐ बाद-ए-सबा जाना

वारिस किरमानी

जमाल-ए-नस्तरनी रंग-ओ-बू-ए-यासमनी

वारिस किरमानी

बहुत दिनों में हम उन से जो हम-कलाम हुए

वारिस किरमानी

ऐ सबा निकहत-ए-गेसू-ए-मुअंबर लाना

वारिस किरमानी

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