नदी Poetry (page 10)

हुस्न-ए-यूसुफ़ किसे कहते हैं ज़ुलेख़ा क्या है

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

क्या मेरे काम से है रवाई को दुश्मनी

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

ले के अपनी ज़ुल्फ़ को वो प्यारे प्यारे हाथ में

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

कहाँ है तू कहाँ है और मैं हूँ

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

ज़मीन-ए-इश्क़ पे ऐ अब्र-ए-ए'तिबार बरस

सय्यद तम्जीद हैदर तम्जीद

कैफ़-ए-सफ़र अब अपना हासिल

सय्यद सिद्दीक़ हसन

वो औरत

सय्यद सज्जाद

जश्न बरबाद ख़यालों का मना लूँ तो चलूँ

सय्यद मुबीन अल्वी ख़ैराबादी

तर्ज़-ए-नौ की शाएरी

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

बस का सफ़र

सय्यद मोहम्मद जाफ़री

आचानक मर जाने वाले लोग

सय्यद काशिफ़ रज़ा

था मगर इतना ज़ियादा तो जुनूँ-ख़ेज़ न था

सय्यद काशिफ़ रज़ा

तिरी आँखों को तेरे हुस्न का दर जाना था

सय्यद काशिफ़ रज़ा

मसर्रत में भी है पिन्हाँ अलम यूँ भी है और यूँ भी

सय्यद हामिद

ठीक है उजली याद का रिश्ता अपने दिल से टूटा भी

सय्यद अारिफ़

तसलसुल पाएमाली का मिलेगा

सय्यद अमीन अशरफ़

फ़साद-ए-क़ल्ब-ओ-नज़र हासिल-ए-तमाशा देख

सय्यद अमीन अशरफ़

बे-लुत्फ़ है ये सोच कि सौदा नहीं रहा

सय्यद अमीन अशरफ़

बहार आती है लेकिन सर में वो सौदा नहीं होता

सय्यद अमीन अशरफ़

अजीब शय है तरह-दार भी तमन्ना भी

सय्यद अमीन अशरफ़

उतर के धूप जब आएगी शब के ज़ीने से

सय्यद अहमद शमीम

था आईने के सामने चेहरा खुला हुआ

सय्यद अहमद शमीम

साक़िया हो गर्मी-ए-सोहबत ज़रा बरसात में

सय्यद अाग़ा अली महर

समाअतों में बहुत दूर की सदा ले कर

स्वप्निल तिवारी

दिन के पहले पहर में ही अपना बिस्तर छोड़ कर

स्वप्निल तिवारी

दिन के पहले पहर मैं ही अपना बिस्तर छोड़ कर

स्वप्निल तिवारी

दिल ज़बाँ ज़ेहन मिरे आज सँवरना चाहें

स्वप्निल तिवारी

वापस घर जा ख़त्म हुआ

सालेह नदीम

हर क़दम साँपों की आहट और मैं

सालेह नदीम

अश्क आँखों में छुपा लेता हूँ मैं

सुरेन्द्र शजर

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