नदी Poetry (page 8)

नूर-जहाँ का मज़ार

तिलोकचंद महरूम

ख़ाक-ए-हिंद

तिलोकचंद महरूम

हमारे वास्ते है एक जीना और मर जाना

तिलोकचंद महरूम

वाहिमा होगा यहाँ कोई न आया होगा

तौसीफ़ तबस्सुम

तुम अच्छे थे तुम को रुस्वा हम ने किया

तौसीफ़ तबस्सुम

था पस-ए-मिज़्गान-तर इक हश्र बरपा और भी

तौसीफ़ तबस्सुम

दिल था पहलू में तो कहते थे तमन्ना क्या है

तौसीफ़ तबस्सुम

आख़िर ख़ुद अपने ही लहू में डूब के सर्फ़-ए-विग़ा होगे

तौसीफ़ तबस्सुम

मिरी सच्चाई हर सूरत तिरी मुट्ठी से निकलेगी

ताैफ़ीक़ साग़र

अक्स-ए-ज़ंजीर पे जाँ देने के पहलू दूँगा

तसनीम फ़ारूक़ी

ज़ब्त करता हूँ वले इस पर भी है ये जोश-ए-अश्क

मीर तस्कीन देहलवी

रहने वालों को तिरे कूचे के ये क्या हो गया

मीर तस्कीन देहलवी

वो कोई सच था या झूटा कोई फ़साना था

तासीर सिद्दीक़ी

फिर आज भूक हमारा शिकार कर लेगी

तारिक़ क़मर

जौन-एलिया से आख़री मुलाक़ात

तारिक़ क़मर

फ़ुरात-ए-इस्मत के साहिलों पर

तारिक़ क़मर

ख़ुश्क आँखों से कहाँ तय ये मसाफ़त होगी

तारिक़ क़मर

बड़ी हवेली के तक़्सीम जब उजाले हुए

तारिक़ क़मर

तुझ को इस तरह कहाँ छोड़ के जाना था हमें

तारिक़ नईम

अब ये हंगामा-ए-दुनिया नहीं देखा जाता

तारिक़ नईम

डूबा हूँ तो किस शख़्स का चेहरा नहीं उतरा

तारिक़ जामी

चढ़ता सूरज उड़ता बादल बहता दरिया कुछ भी नहीं

तनवीर गौहर

दश्त में जो भी है जैसा मिरा देखा हुआ है

तनवीर सामानी

आशाएँ

तनवीर अंजुम

सूरज सारा शहर डराता रहता है

तनवीर अंजुम

जलना हो तो मुझ से जल

तन्हा तिम्मापुरी

बात कुछ यूँ है कि ये ख़ौफ़ का मंज़र तो नहीं

तन्हा तिम्मापुरी

मैं दयार-ए-क़ातिलाँ का एक तन्हा अजनबी

तालिब जोहरी

वो जो दरिया के बीच रहता है

ताजदार आदिल

ज़ख़्म कब का था दर्द उठा है अब

ताजदार आदिल

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