नदी Poetry (page 7)

कुछ समझ कर ही हुआ हूँ मौज-ए-दरिया का हरीफ़

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

ज़ब्त की कोशिश है जान-ए-ना-तवाँ मुश्किल में है

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

लुत्फ़-ए-निहाँ से जब जब वो मुस्कुरा दिए हैं

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

और इशरत की तमन्ना क्या करें

वहशत रज़ा अली कलकत्वी

आरियों की पहली आमद हिन्दोस्तान में

वहीदुद्दीन सलीम

अपना नफ़स नफ़स है कि शो'ला कहें जिसे

वाहिद प्रेमी

अपना नफ़स नफ़स है कि शो'ला कहें जिसे

वाहिद प्रेमी

सहराओं में दरिया भी सफ़र भूल गया है

वहीद अख़्तर

रात भर ख़्वाब के दरिया में सवेरा देखा

वहीद अख़्तर

एक आदमी

वहाब दानिश

तुम ने हमारा साथ दिया तो ख़ुद को हम पा जाएँगे

विश्वनाथ दर्द

आग दरिया को इशारों से लगाने वाला

विशाल खुल्लर

सब के आगे नहीं बिखरना है

विकास शर्मा राज़

रोज़ ये ख़्वाब डराता हैं मुझे

विकास शर्मा राज़

न हम-सफ़र है न हम-नवा है

विकास शर्मा राज़

मंज़िलों से भी आगे निकलता हुआ

विकास शर्मा राज़

बारिश में अक्सर ऐसा हो जाता है

विकास शर्मा राज़

नम आँखों में क्या कर लेगा ग़ुस्सा देखेंगे

विजय शर्मा अर्श

बहुत टूटा हूँ लेकिन हौसला ज़िंदा बहुत कुछ है

वली मदनी

हम कभी ख़ुद से कोई बात नहीं कर पाते

उषा भदोरिया

ढूँढिए इस शहर में अब किस को हासिल कौन है

उर्मिलामाधव

जाने कब तूफ़ान बने और रस्ता रस्ता बिछ जाए

उम्मीद फ़ाज़ली

ज़ेहन-ओ-दिल में कुछ न कुछ रिश्ता भी था

उम्मीद फ़ाज़ली

ऐ दिल-ए-ख़ुद-ना-शनास ऐसा भी क्या

उम्मीद फ़ाज़ली

हमें तो टूटी हुई कश्तियाँ नहीं दिखतीं

उमर फ़ारूक़

बाहर बाहर सन्नाटा है अंदर अंदर शोर बहुत

उमर अंसारी

सुना ये था बहुत आसूदा हैं साहिल के बाशिंदे

उमैर मंज़र

कभी इक़रार होना था कभी इंकार होना था

उमैर मंज़र

अश्क-दर-अश्क वही लोग रवाँ मिलते हैं

त्रिपुरारि

तलातुम आरज़ू में है न तूफ़ाँ जुस्तुजू में है

तिलोकचंद महरूम

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