नदी Poetry (page 37)

अदावतों में जो ख़ल्क़-ए-ख़ुदा लगी हुई है

फ़ैसल अजमी

नमक की रोज़ मालिश कर रहे हैं

फ़हमी बदायूनी

सब्र की चादर तह कर दी

फ़हीम शनास काज़मी

मुझे कौन बुलाता रहता है

फ़हीम शनास काज़मी

''ला'' भी है एक गुमाँ

फ़हीम शनास काज़मी

भगत-सिंह के नाम

फ़हीम शनास काज़मी

आईना देखते हो

फ़हीम शनास काज़मी

आहिस्ता से गुज़रो

फ़हीम शनास काज़मी

मैं यूँ जहाँ के ख़्वाब से तन्हा गुज़र गया

फ़हीम शनास काज़मी

शाम ख़ामोश है पेड़ों पे उजाला कम है

फ़हीम जोगापुरी

जाम खनके तो सँभाला न गया दिल तुम से

एज़ाज़ अफ़ज़ल

नूर की किरन उस से ख़ुद निकलती रहती है

एजाज़ सिद्दीक़ी

ख़ुश्क दरिया पड़ा है ख़्वाहिश का

एजाज़ रहमानी

ग़म भी उतना नहीं कि तुम से कहें

एजाज़ उबैद

तंहाई

एजाज़ फ़ारूक़ी

मैं

एजाज़ फ़ारूक़ी

हर्फ़

एजाज़ फ़ारूक़ी

हूँ मैं भी शो'बदा कोई दुनिया के सामने

एजाज़ अासिफ़

पहचान

एजाज़ अहमद एजाज़

ये दुनिया है यहाँ असली कहानी पुश्त पर रखना

एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी

शुऊर-ए-नौ-उम्र हूँ न मुझ को मता-ए-रंज-ओ-मलाल देना

एहतिशामुल हक़ सिद्दीक़ी

सता रही है बहुत मछलियों की बास मुझे

एहतिशाम अख्तर

चराग़ दिल का था रौशन बुझा गया पानी

एहतिशाम अख्तर

सुर्ख़ मौसम की कहानी है पुरानी हो न हो

एहतराम इस्लाम

बज़्म-ए-तन्हाई में अक्स-ए-शो'ला-पैकर था कोई

एहतराम इस्लाम

रंग-ए-तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के शनासा हम भी हैं

एहसान दानिश

हर दर्द से बाँधे हुए रिश्ता कोई गुज़रे

डाक्टर मोहम्मद अली जौहर

सब्र के दरिया में जब आ जाएगा

दिनेश ठाकुर

रात से दिन का वो जो रिश्ता थी

दिनेश नायडू

जो भी निकले तिरी आवाज़ लगाता निकले

दिनेश नायडू

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