दश्त Poetry (page 27)

जीने के लिए जो मर रहे हैं

एहसान दानिश

आज भड़की रग-ए-वहशत तिरे दीवानों की

एहसान दानिश

बुलंद फ़िक्र की हर शे'र से अयाँ हो रमक़

डॉक्टर आज़म

ज़माने ठीक है इन से बहुत हुए रौशन

दिनेश नायडू

चाक पर मिट्टी को मर जाना है

दिनेश नायडू

मंज़र से उधर ख़्वाब की पस्पाई से आगे

दिलावर अली आज़र

कब तक फिरूंगा हाथ में कासा उठा के मैं

दिलावर अली आज़र

हवस से जिस्म को दो-चार करने वाली हवा

दिलावर अली आज़र

ऐ इश्क़ तू ने वाक़िफ़-ए-मंज़िल बना दिया

दिल शाहजहाँपुरी

तमाम नूर-ए-तजल्ली तमाम रंग-ए-चमन

दर्शन सिंह

राज़-ए-निहाँ थी ज़िंदगी राज़-ए-निहाँ है आज भी

दर्शन सिंह

इस राह में आते हैं बयाबाँ भी चमन भी

दर्शन सिंह

शहर से क्या गई जानिब-ए-दश्त-ए-ज़र ज़िंदगी फ़ाख़्ता

दानियाल तरीर

आग में जलते हुए देखा गया है

दानियाल तरीर

रामायण का एक सीन

चकबस्त ब्रिज नारायण

शिकन-अंदर-शिकन याद आ गया है

बुशरा ज़ैदी

सर-ए-दश्त दिल जो सराब था कोई ख़्वाब था

बुशरा हाश्मी

हमारी जागती आँखों में ख़्वाब सा क्या था

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

देता था जो साया वो शजर काट रहा है

बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन

नास्टैल्जिया

बिलाल अहमद

ज़मीं नई थी अनासिर की ख़ू बदलती थी

बिलाल अहमद

फिर आई फ़स्ल-ए-गुल फिर ज़ख़्म-ए-दिल रह रह के पकते हैं

भारतेंदु हरिश्चंद्र

सवाब है या किसी जनम का हिसाब कोई चुका रहा हूँ

भारत भूषण पन्त

सच्चाइयों को बर-सर-ए-पैकार छोड़ कर

भारत भूषण पन्त

आब की तासीर में हूँ प्यास की शिद्दत में हूँ

भारत भूषण पन्त

ये दिल जो मुज़्तरिब रहता बहुत है

बेदिल हैदरी

ये दिल जो मुज़्तरिब रहता बहुत है

बेदिल हैदरी

मिरी दास्तान-ए-अलम तो सुन कोई ज़लज़ला नहीं आएगा

बेदिल हैदरी

तेरी उल्फ़त शोबदा-पर्वाज़ है

बेदम शाह वारसी

राज़ है इबरत-असर फ़ितरत की हर तहरीर का

बेबाक भोजपुरी

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