दीवार Poetry (page 45)

ये भी अच्छा है कि सहरा में बनाया है मकाँ

अतहर शाह ख़ान जैदी

ये तिरी ज़ुल्फ़ का कुंडल तो मुझे मार चला

अतहर शाह ख़ान जैदी

गिरती हुई दीवार का साया था तिरा साथ

अतहर राज़

फूलों से बहारों में जुदा थे तो हमीं थे

अतहर राज़

बनाना पड़ता है अपने बदन को छत अपनी

अतहर नासिक

सफ़र भी जब्र है नाचार करना पड़ता है

अतहर नासिक

ये धूप तो हर रुख़ से परेशाँ करेगी

अतहर नफ़ीस

इतने दिन के बाद तू आया है आज

अतहर नफ़ीस

मैं कि ख़ुद अपने ख़यालात का ज़िंदानी हूँ

अतहर नादिर

सिसकते फूलों का कोई भी दर्द-मंद नहीं

अतहर अज़ीज़

तिलिस्म-ए-शब से बहुत बे-ख़बर चले आए

अताउर्रहमान क़ाज़ी

फ़ाख़्ता शाख़ से उड़ते हुए घबराई थी

अताउल हसन

मंज़िलें भी ये शिकस्ता-बाल-ओ पर भी देखना

अताउल हक़ क़ासमी

दर्द की धूप में सहरा की तरह साथ रहे

अता शाद

ज़िंदगी आईना है आईना-आराई है

अता शाद

पारसाओं ने बड़े ज़र्फ़ का इज़हार किया

अता शाद

पस-ए-दीवार हुज्जत किस लिए है

अता आबिदी

एक ग़मगीन याद

असरार-उल-हक़ मजाज़

दिल्ली से वापसी

असरार-उल-हक़ मजाज़

आज की रात

असरार-उल-हक़ मजाज़

ज़लज़ले का ख़ौफ़ तारी है दर-ओ-दीवार पर

असलम कोलसरी

शाम का रक़्स

असलम इमादी

मौत का इंतिज़ार सफ़ेद चाक से

असलम इमादी

कोई दीवार सलामत है न अब छत मेरी

असलम आज़ाद

कोई दीवार सलामत है न अब छत मेरी

असलम आज़ाद

फ़क़त हर्फ़-ए-तमन्ना क्या है

असलम अंसारी

गुबार-ए-एहसास-ए-पेश-ओ-पस की अगर ये बारीक तह हटाएँ

असलम अंसारी

तुम भटक जाओ तो कुछ ज़ौक़-ए-सफ़र आ जाएगा

आसिम वास्ती

उम्र सारी तिरी चाहत में बितानी पड़ जाए

अासिफ़ शफ़ी

फ़लक को किस ने इक परकार पर रक्खा हुआ है

अासिफ़ शफ़ी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.