देख Poetry (page 10)

सूरतों के शहर में रौज़न ही रौज़न देख कर

तनवीर सामानी

सुनाओ मुझे भी एक लतीफ़ा

तनवीर अंजुम

हम दोनों में से एक

तनवीर अंजुम

मैं दयार-ए-क़ातिलाँ का एक तन्हा अजनबी

तालिब जोहरी

मैं चाँद भेज रहा हूँ कि तुम को देख आए

तालिब हुसैन तालिब

शराब शहर में नीलाम हो गई होगी

तालिब हुसैन तालिब

कट गई उम्र यही एक तमन्ना करते

तल्हा रिज़वी बारक़

इंकार भी करने का बहाना नहीं मिलता

तालीफ़ हैदर

हम हिज्र के रस्तों की हवा देख रहे हैं

तालीफ़ हैदर

नज़र भर के जो देख सकते हैं तुझ को

ताजवर नजीबाबादी

जिंस-ए-हुनर मज़ाक़-ए-ख़रीदार देख कर

ताजवर नजीबाबादी

हुस्न-ए-शोख़-चश्म में नाम को वफ़ा नहीं

ताजवर नजीबाबादी

ऐ आरज़ू-ए-शौक़ तुझे कुछ ख़बर है आज

ताजवर नजीबाबादी

बंद दरीचों के कमरे से पूर्वा यूँ टकराई है

ताज सईद

तुम कोई इस से तवक़्क़ो' न लगाना मरे दोस्त

तैमूर हसन

मोती नहीं हूँ रेत का ज़र्रा तो मैं भी हूँ

तैमूर हसन

मैं ने बख़्श दी तिरी क्यूँ ख़ता तुझे इल्म है

तैमूर हसन

आसमाँ और ज़मीं की वुसअत देख

तहज़ीब हाफ़ी

इक हवेली हूँ उस का दर भी हूँ

तहज़ीब हाफ़ी

तो तय हुआ ना कि जब भी लिखना रुतों के सारे अज़ाब लिखना

ताहिर तोनस्वी

मिट गए हाए मकीं और मकान-ए-देहली

तफ़ज़्ज़ुल हुसैन ख़ान कौकब देहलवी

सारबान

ताबिश कमाल

कहाँ आ गई हो

ताबिश कमाल

एक बुज़ुर्ग शायर परिंदे का तजरबा

ताबिश कमाल

देव-मालाएँ सच्ची होती हैं

ताबिश कमाल

कब खुलेगा कि फ़लक पार से आगे क्या है

ताबिश कमाल

अजीब सुब्ह थी दीवार ओ दर कुछ और से थे

ताबिश कमाल

एक जल्वा ब-सद अंदाज़-ए-नज़र देख लिया

ताबिश देहलवी

ज़वाल की आख़िरी हिचकियाँ

तबस्सुम काश्मीरी

एक लम्बी काफ़िर लड़की

तबस्सुम काश्मीरी

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