देर Poetry (page 26)

अफ़सोस बनी ही नहीं पहचान अभी तक

डॉक्टर आज़म

हज़ारों बार कह कर बेवफ़ा को बा-वफ़ा मैं ने

दिवाकर राही

दरून-ए-ख़्वाब नया इक जहाँ निकलता है

दिलावर अली आज़र

बना रहा था कोई आब ओ ख़ाक से कुछ और

दिलावर अली आज़र

राहत कहाँ नसीब थी जो अब कहीं नहीं

दत्तात्रिया कैफ़ी

ढूँढने से यूँ तो इस दुनिया में क्या मिलता नहीं

दत्तात्रिया कैफ़ी

वो सलीक़ा हमें जीने का सिखा दे साक़ी

दर्शन सिंह

रक़्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है

दर्शन सिंह

कहीं जमाल-ए-अज़ल हम को रूनुमा न मिला

दर्शन सिंह

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

कहानी एक रात की

दानिश फ़राज़ी

तमाशा-ए-दैर-ओ-हरम देखते हैं

दाग़ देहलवी

फिरता है मेरे दिल में कोई हर्फ़-ए-मुद्दआ

दाग़ देहलवी

न जाना कि दुनिया से जाता है कोई

दाग़ देहलवी

तमाशा-ए-दैर-ओ-हरम देखते हैं

दाग़ देहलवी

क़रीने से अजब आरास्ता क़ातिल की महफ़िल है

दाग़ देहलवी

फिरे राह से वो यहाँ आते आते

दाग़ देहलवी

ना-रवा कहिए ना-सज़ा कहिए

दाग़ देहलवी

ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा

दाग़ देहलवी

हाथ निकले अपने दोनों काम के

दाग़ देहलवी

चेहरे पे नूर-ए-सुब्ह सियह गेसुओं में रात

दाएम ग़व्वासी

खुलती है चाँदनी जहाँ वो कोई बाम और है

डी. राज कँवल

मोहब्बत की गली से हम जहाँ हो कर निकल आए

चित्रांश खरे

बे-ख़ुदी में है न वो पी कर सँभल जाने में है

चरख़ चिन्योटी

ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है

चाँदनी पांडे

कुछ ऐसा पास-ए-ग़ैरत उठ गया इस अहद-ए-पुर-फ़न में

चकबस्त ब्रिज नारायण

बे-क़रारी दिल-ए-मुज़्तर की बढ़ाई हम ने

बबल्स होरा सबा

होती नहीं रसाई-ए-बर्क़-ए-तपाँ कहाँ

ब्रहमा नन्द जलीस

दास्तान-ए-शमअ' थी या क़िस्सा-ए-परवाना था

ब्रहमा नन्द जलीस

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