दिल Poetry (page 166)

क्या कहूँ क्या मिला है क्या न मिला

रविश सिद्दीक़ी

ख़्वाब-ए-दीदार न देखा हम ने

रविश सिद्दीक़ी

ख़िरद को गुमशुदा-ए-कू-ब-कू समझते हैं

रविश सिद्दीक़ी

ख़ल्वती-ए-ख़याल को होश में कोई लाए क्यूँ

रविश सिद्दीक़ी

कौन कहता मुझे शाइस्ता-ए-तहज़ीब-ए-जुनूँ

रविश सिद्दीक़ी

कहीं फ़साना-ए-ग़म है कहीं ख़ुशी की पुकार

रविश सिद्दीक़ी

इश्क़ की शरह-ए-मुख़्तसर के लिए

रविश सिद्दीक़ी

इल्तिफ़ात-आश्ना हिजाब तिरा

रविश सिद्दीक़ी

हुस्न-ए-असनाम ब-हर-लम्हा फ़ुज़ूँ है कि नहीं

रविश सिद्दीक़ी

हम मय-कशों के क़दमों पर अक्सर

रविश सिद्दीक़ी

हवस-ए-ख़लवत-ए-ख़ुर्शीद-ओ-निशाँ और सही

रविश सिद्दीक़ी

एक लग़्ज़िश में दर-ए-पीर-ए-मुग़ाँ तक पहुँचे

रविश सिद्दीक़ी

चला है ले के मुझे ज़ौक़-ए-जुस्तुजू मेरा

रविश सिद्दीक़ी

बुत-गर है न कोई बुत-शिकन है

रविश सिद्दीक़ी

बादा-ए-गुल को सब अंदोह-रुबा कहते हैं

रविश सिद्दीक़ी

वस्ल उस से न हो विसाल तो हो

रौनक़ टोंकवी

उन से मिलना किसी बहाने से

रौनक़ टोंकवी

उन के जाने से ये दिल में हुई सूरत पैदा

रौनक़ टोंकवी

नुस्ख़े में तबीबों ने लिखा और ही कुछ है

रौनक़ टोंकवी

न बुतों के न अब ख़ुदा के रहे

रौनक़ टोंकवी

न बातें कीं न तस्कीं दी न पहलू में ज़रा ठहरे

रौनक़ टोंकवी

क्या देखते हैं आप झिजक कर शराब में

रौनक़ टोंकवी

हम उन को हाल-ए-दिल अपना सुनाए जाते हैं

रौनक़ टोंकवी

हम हैं हुशियार क्या इरादा है

रौनक़ टोंकवी

दिल तक हो चाक तेग़ जो सर पर लगाइए

रौनक़ टोंकवी

दौड़े वो मेरे क़त्ल को तलवार खींच कर

रौनक़ टोंकवी

शाम-ए-ग़म की है अता सुब्ह-ए-मसर्रत दी है

रौनक़ रज़ा

रात की सारी हक़ीक़त दिन में उर्यां हो गई

रौनक़ रज़ा

अँधेरी खाई से गोया सफ़र चटान का था

रौनक़ रज़ा

ना-तवानी में भी वो किरदार होना चाहिए

रौनक़ नईम

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